West Asia Tensions: पश्चिम एशिया में जारी तनाव बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची मंगलवार को एक बार फिर इस्लामाबाद पहुंचे है। पिछले 48 घंटों में उनकी यह तीसरी यात्रा है जब वह पाकिस्तान पहुंचे है। इससे पहले अराघची रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। फिर वहां से सीधे पाकिस्तान पहुंचे है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है।जब क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर माना जा रहा है और कई स्तरों पर अप्रत्यक्ष बातचीत की कोशिशें चल रही हैं।
पुतिन से मुलाकात के बाद पाकिस्तान पहुंचे अराघची
अब्बास अराघची ने सेंट पीटर्सबर्ग में व्लादिमीर पुतिन के साथ लंबी बैठक की थी। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान-रूस रणनीतिक साझेदारी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने मौजूदा तनाव और अमेरिका-इजराइल नीति के प्रभावों पर भी विचार साझा किए। इस मुलाकात के तुरंत बाद अराघची का इस्लामाबाद पहुंचना कई कूटनीतिक संकेत दे रहा है।
पाकिस्तान की भूमिका पर बढ़ा फोकस
इधर, पाकिस्तान में लगातार हो रहे अराघची के दौरों ने यह संकेत दिया है कि पाकिस्तान इस पूरे संकट में एक संभावित मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। माना जा रहा है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का माध्यम बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की यह सक्रियता क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों का हिस्सा हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
रूस-ईरान साझेदारी और रणनीतिक संदेश
रूस यात्रा के दौरान अराघची ने ईरान-रूस संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” बताया और कहा कि मौजूदा हालात में मॉस्को का समर्थन महत्वपूर्ण है। वहीं, पुतिन ने भी पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करने की बात कही।
यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और प्रस्ताव
इस बीच वॉशिंगटन में अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के प्रस्ताव पर चर्चा की पुष्टि की गई है। इस प्रस्ताव में संघर्ष समाप्त करने, परमाणु वार्ता को आगे बढ़ाने और प्रमुख समुद्री मार्गों को फिर से खोलने की बात शामिल है।
हालांकि, अभी तक किसी ठोस समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।
क्या खत्म होगा युद्ध?
लगातार हो रही कूटनीतिक गतिविधियां यह संकेत जरूर देती हैं कि पर्दे के पीछे बातचीत तेज है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। रूस, पाकिस्तान और ईरान की सक्रियता से उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन अंतिम नतीजा आने वाले दिनों की राजनीतिक दिशा पर निर्भर करेगा।






