Bengal Election 2026 Phase- 2 Voting: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में मतदाताओं ने लोकतंत्र का ऐसा उत्सव मनाया कि वोटिंग का नया रिकॉर्ड बन गया। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस चरण में करीब 91.41% मतदान दर्ज किया गया है। सुबह 7 बजे शुरू हुई वोटिंग शाम 6 बजे तक चली, लेकिन कई जगहों पर देर शाम तक मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
पहले चरण में 93.19% मतदान हुआ था, और दूसरे चरण ने भी उसी स्तर को लगभग छूते हुए यह संकेत दे दिया है कि इस बार का चुनाव जनभागीदारी के लिहाज से ऐतिहासिक साबित हो सकता है। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यह आंकड़ा अस्थायी है और अंतिम आंकड़े में हल्की बढ़ोतरी संभव है।
इन जिलों में हुई वोटिंग, शहर से गांव तक उमड़ा जनसैलाब
दूसरे चरण में राजधानी कोलकाता समेत राज्य के छह प्रमुख जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। इनमें नदिया डिस्ट्रिक्ट, पूर्व बर्धमान, हुगली डिस्ट्रिक्ट, साउथ 24 परगना, नॉर्थ 24 परगना और हावड़ा डिस्ट्रिक्ट शामिल हैं।
इन सभी इलाकों में सुबह से ही बूथों पर भीड़ दिखी और खास बात यह रही कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भारी मतदान दर्ज किया गया।
3.21 करोड़ मतदाता, 1,448 उम्मीदवार मैदान में
इस चरण में 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पात्र थे। इनमें 1.64 करोड़ पुरुष, 1.57 करोड़ महिलाएं और 792 थर्ड जेंडर वोटर्स शामिल हैं।
कुल 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। खास बात यह रही कि कई इलाकों में महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर या उससे अधिक दर्ज की गई। जो चुनावी रुझानों को प्रभावित कर सकती है।
हिंसा और EVM विवाद की खबरें, लेकिन हालात नियंत्रण में
वोटिंग के दौरान कुछ जगहों से EVM खराब होने और छेड़छाड़ की शिकायतें, साथ ही राजनीतिक झड़पों की खबरें सामने आईं। हालात को संभालने के लिए कुछ क्षेत्रों में सुरक्षाबलों को लाठीचार्ज भी करना पड़ा।
हालांकि, राहत की बात यह रही कि कहीं से भी कोई बड़ी हिंसक घटना या जनहानि की खबर नहीं आई, और चुनाव आयोग ने मतदान को कुल मिलाकर शांतिपूर्ण बताया।
भवानीपुर बनी सबसे बड़ी ‘पॉलिटिकल बैटल’
इस चरण की सबसे हाई-वोल्टेज सीट रही भवानीपुर, जहां सीधा मुकाबला है। यहां पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC मुखिया ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच।
यह सीट केवल चुनावी मैदान नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की जंग बन चुकी है। इसे नंदीग्राम की तरह देखा जा रहा है, जहां 2021 में ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए भवानीपुर का परिणाम पूरे राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
सुरक्षा के सख्त इंतजाम, हर बूथ पर नजर
चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जिनमें हर बूथ पर वेबकास्टिंग और निगरानी की व्यवस्था की गई।
सुरक्षा के लिए 2,407 केंद्रीय बलों की कंपनियां तैनात रहीं, जबकि राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस ने भी मोर्चा संभाला। इन कड़े इंतजामों की वजह से अधिकांश जगहों पर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
अब सबकी नजर 4 मई पर
अब चुनावी तस्वीर साफ होगी 4 मई को, जब मतगणना होगी। इस दिन पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम, तमिल नाडु, केरल और पुडुचेरी के नतीजे भी सामने आएंगे।






