Russia-Ukraine War: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है और रूस इस संघर्ष में निर्णायक बढ़त हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी बीच युद्ध के मैदान से जुड़े नए सैन्य दावों और घटनाक्रमों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
रूसी MiG-31 की भूमिका पर बड़ा दावा
रिपोर्टों और सैन्य विश्लेषणों के अनुसार रूस के MiG-31 (Foxhound) लड़ाकू विमान यूक्रेन युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन्हें मुख्य रूप से लंबी दूरी से हवाई हमलों और मिसाइल प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, न कि सीधे डॉगफाइट के लिए।
रूस की ओर से दावा किया गया है कि MiG-31 ने लंबी दूरी की R-37M हवा-से-हवा मिसाइलों की मदद से कई यूक्रेनी विमानों को निशाना बनाया है। इन मिसाइलों की रेंज लगभग 300 से 400 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे इन्हें “स्टैंड-ऑफ वेपन सिस्टम” माना जाता है।
किंझल मिसाइल और रणनीतिक उपयोग
MiG-31 के एक विशेष संस्करण MiG-31K को Kh-47M2 किंझल हाइपरसोनिक मिसाइल लॉन्च करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह मिसाइल अत्यधिक तेज गति (हाइपरसोनिक) से लक्ष्य की ओर बढ़ती है और इसे रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
इसके अलावा MiG-31 का शक्तिशाली जस्लोन रडार सिस्टम लंबी दूरी तक कई लक्ष्यों को ट्रैक करने में सक्षम बताया जाता है, जिससे यह अन्य रूसी लड़ाकू विमानों के लिए भी एक सपोर्ट प्लेटफॉर्म की तरह काम करता है।
यूक्रेन का दावा और जवाबी कार्रवाई
यूक्रेन ने कई मौकों पर दावा किया है कि उसने रूस के MiG-31 विमानों या उनके संचालन पर प्रभाव डाला है, जिसमें क्रीमिया क्षेत्र में ड्रोन हमलों के जरिए सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना भी शामिल है। हालांकि रूस इन दावों की पुष्टि नहीं करता।
पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को दी गई Patriot जैसी एयर डिफेंस प्रणालियों ने कुछ हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह क्षमता सीमित और स्थिति-निर्भर है।
वर्तमान स्थिति (मई 2026 तक)
हालिया रिपोर्टों के अनुसार रूस ने MiG-31K विमानों को बेलारूस और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में तैनात रखा है, जिसे NATO देशों के लिए भी एक रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। युद्ध में दोनों पक्षों की ओर से किए गए दावे अक्सर अलग-अलग और अपुष्ट होते हैं, जिससे वास्तविक क्षति और उपलब्धियों का स्वतंत्र आकलन कठिन हो जाता है।
बता दें कि MiG-31 और उससे जुड़े हथियार सिस्टम रूस के लिए लंबी दूरी की हवाई क्षमता का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं, जबकि यूक्रेन लगातार अपनी एयर डिफेंस क्षमता मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इस संघर्ष में दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक स्थिति अभी भी कई स्तरों पर विवादित और अनिश्चित बनी हुई है।
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