Pakistan Fuel Crisis: पाकिस्तान में बढ़ती तेल कीमतों और महंगाई को लेकर मार्च से ही बवाल मचा हुआ है। ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग की वजह से होर्मुज नाकाबंदी ने तेल की कीमतों में आग लगा दी है। बढ़ी हुई महंगाई के बाद उपजे गुस्से से कई जगहों पर लोगों ने सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है।
पाकिस्तान 85% तेल इसी रास्ते से मंगाता है। मौजूदा समय में पाकिस्तान में पेट्रोल 485 रु/लीटर तक पहुंच गया है, जबकि डीजल 520.35 रु/लीटर तक पहुंच गया है।पेट्रोलियम उत्पादों में एक महीने में 42.7% से 54.9% तक बढ़ोतरी पाकिस्तान सरकार ने कर दी है।
पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है। पाकिस्तान के पास महज 26 दिन का पेट्रोल बचा है, जबकि डीजल 25 दिन और क्रूड सिर्फ 10 दिन का बचा है।
बेतहाशा महंगाई की वजह से जनता सड़क पर आ गई है। लाहौर और इस्लामाबाद में ऑटो ड्राइवरों का प्रदर्शन हो रहा है। महंगाई की वजह से लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है और लोगों की कमाई खत्म होती जा रही है।
शहबाज सरकार ने इमरजेंसी जैसे हालातों में कई कड़े कदम उठाए हैं, जिसके तहत:
- सरकारी दफ्तर हफ्ते में 4 दिन चलेंगे, 50% वर्क फ्रॉम होम।
- स्कूल-कॉलेज 2 दिन बंद, कई जगह 2 हफ्ते तक बंद किए गए।
- सरकारी गाड़ियों का ईंधन भत्ता 25% काटा गया।
- पाकिस्तान डे परेड रद्द: 23 मार्च को सिर्फ झंडा फहराकर कार्यक्रम मनाया गया, ताकि पेट्रोल बचाया जा सके।
सऊदी और अमेरिका से मदद की गुहार
पाकिस्तान ने यूएई से 5 अरब डॉलर के अलावा 5 अरब डॉलर का उधार तेल मांगा, लेकिन यूएई ने इसे ठुकरा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई चाहता है कि पाकिस्तान ईरान के खिलाफ खुलकर खड़ा हो, लेकिन पाकिस्तान अमेरिका और ईरान दोनों के बीच मध्यस्थता की बात करते हुए सीधे तौर पर जंग में शामिल होने से बच रहा है।
पेट्रोलियम कीमतों के बढ़ने पर सरकार ने कई उपाय लागू किए हैं:
- फ्री सफर: कई शहरों में बसें फ्री कर दी गईं ताकि लोग निजी गाड़ियां कम चलाएं।
- PSL मैच खाली स्टेडियम में: तेल बचाने के लिए दर्शकों को नहीं बुलाया गया।
- फैक्ट्रियां बंद: तेल की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप हो गया है, वहीं कई कंपनियों और फैक्ट्रियों ने कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है।
पाकिस्तान के पास महज 9-14 दिन का पेट्रोलियम स्टॉक बचा है। बांग्लादेश के पास भी पाकिस्तान से ज्यादा पेट्रोलियम उत्पाद मौजूद हैं। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 8 बिलियन डॉलर से कम रह गया है, यानी देश के लिए 1 महीने का आयात चलाना भी मुश्किल होता जा रहा है।






