Madras High Court: बकरीद से पहले मद्रास हाई कोर्ट ने गौहत्या और गोवंश की कुर्बानी को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इस्लाम धर्म में गाय और बछड़ों की कुर्बानी कोई अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इतिहास में कई मुस्लिम शासकों ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए गोहत्या पर रोक लगाई थी।
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण की बेंच ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि बकरीद या किसी भी अन्य दिन राज्य में गाय और बछड़ों की अवैध कुर्बानी न होने दी जाए। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर पशुओं की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित होनी चाहिए और कानून का सख्ती से पालन कराया जाए।
संविधान और कानून का हवाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 48 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार का दायित्व है कि वह गाय, बछड़ों और दुधारू पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। अदालत ने तमिल नाडु एनिमल प्रिजर्वेशन Act, 1958 की धारा-4 का हवाला देते हुए कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही कुछ पशुओं के वध की अनुमति दी जा सकती है।
कोर्ट ने कहा कि 10 साल से अधिक उम्र और प्रजनन में अक्षम पशु को ही वैध प्रमाणपत्र मिलने के बाद काटा जा सकता है। अदालत ने इस प्रावधान की सख्त व्याख्या करने की बात कही।
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याचिका में अवैध कटाई का आरोप
यह मामला इंदु मक्कल काची के राज्य महासचिव सूर्य द्वारा दायर याचिका पर सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कई जगहों पर सार्वजनिक स्थलों पर अवैध रूप से गायों की कटाई की जा रही है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि प्रशासन को पहले भी ज्ञापन दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने गोवंश वध कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग वाली एक अन्य याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े मुद्दे को त्योहार से ठीक पहले उठाया गया है, इसलिए तुरंत हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
कलकत्ता हाईकोर्ट भी दे चुका है समान टिप्पणी
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट भी ईद-उल-जुहा के दौरान गाय की कुर्बानी को इस्लाम की अनिवार्य प्रथा न मानने संबंधी टिप्पणी कर चुका है। अदालत ने कहा था कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी पशु का वध पूरी तरह प्रतिबंधित है और केवल नियमों के तहत अधिकृत स्थानों पर ही इसकी अनुमति दी जा सकती है।
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