Taliban Russia Military Cooperation: कभी एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे रूस और तालिबान ने अब एक ऐतिहासिक समझौते की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। रूस-तालिबान के बीच सैन्य सहयोग का यह समझौता अब केवल प्रतीकात्मकता तक सीमित नहीं माना जा रहा। अगर मॉस्को या काबुल 27 मई 2026 के इस कथित वास्तविक समझौते को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक कर देते हैं, तो एशिया में अमेरिका के लिए नई रणनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। फिलहाल दोनों पक्ष इस समझौते को गुप्त रखे हुए हैं। माना जा रहा है कि इसे इसलिए भी छिपाया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट न हो सके कि समझौता केवल सैन्य प्रशिक्षण और तकनीकी रखरखाव तक सीमित है या इसमें हथियारों की बिक्री और रक्षा उत्पादन भी शामिल है।
रूस और तालिबान के बीच हथियारों और सैन्य तकनीक के हस्तांतरण की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। शुरुआती संभावित हस्तांतरण में रूस के Mi-17 हेलीकॉप्टर, T-62 टैंक, BMP वाहनों के स्पेयर पार्ट्स और अन्य सोवियत दौर के हथियार शामिल बताए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल अफगान सेना पहले से करती रही है। इसके अलावा आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में तालिबान को रूसी छोटे हथियार, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और यहां तक कि अफगानिस्तान में लाइसेंस आधारित हथियार उत्पादन की तकनीक भी दी जा सकती है।
पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तालिबान इकाइयों के पास कॉर्नेट ATGM या ओरलान ड्रोन जैसे उन्नत रूसी सिस्टम दिखाई देते हैं, तो यह पाकिस्तान के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकता है। समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सैन्य कर्मियों का आदान-प्रदान भी संभव बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक काबुल, कंधार और उत्तरी अफगान ठिकानों पर रूसी सैन्य सलाहकारों और प्रशिक्षकों की मौजूदगी देखी गई है। वहीं तालिबान अधिकारियों को रूसी सैन्य अकादमियों में प्रशिक्षण दिए जाने की चर्चा भी तेज है। रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु पहले ही तालिबान के रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब से मुलाकात कर चुके हैं, ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सैन्य अधिकारियों का आदान-प्रदान बड़े स्तर पर हो सकता है।
ये भी पढ़ेंः
हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, कई मजदूरों के दबे होने की आशंका
संयुक्त ISIS-K अभियान की तैयारी
रूस ने 2024 में तालिबान को “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोगी” बताया था। अब माना जा रहा है कि आने वाले समय में ISIS-K के खिलाफ तालिबान के अभियानों में रूस खुफिया जानकारी साझा कर सकता है या हवाई समर्थन भी दे सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह साफ संकेत होगा कि रूस-तालिबान संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि जमीनी सैन्य सहयोग में बदल चुके हैं।
यूक्रेन युद्ध में अफगान लड़ाकों की आशंका
विश्लेषकों के बीच यह भी चर्चा है कि जिस तरह उत्तर कोरिया ने 2024 के बाद रूस के समर्थन में सैनिक भेजे थे, उसी तरह भविष्य में तालिबान लड़ाकों का इस्तेमाल भी रूस यूक्रेन युद्ध में कर सकता है। हालांकि फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर डोनेट्स्क या लुहांस्क जैसे इलाकों में अफगान लड़ाके दिखाई देते हैं तो यह रूस-तालिबान सैन्य समझौते को वास्तविक और सक्रिय साबित कर सकता है।
अफगान मामलों के विशेषज्ञ हमीद हकीमी समेत कई विश्लेषकों का मानना है कि रूस और तालिबान के बीच सीमित स्तर पर हथियारों का आदान-प्रदान और सैन्य सहयोग संभव है। यूक्रेन युद्ध के चलते रूस आर्थिक दबाव में है, जबकि तालिबान सरकार भी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है। ऐसे समय में दोनों के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग वैश्विक राजनीति में एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ संकेत माना जा रहा है, जहां अमेरिका और पाकिस्तान के लिए आने वाले वर्षों में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
ये भी पढ़ेंः





