Iran Missile Attack: ईरान और अमेरिका में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने बुधवार को कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इससे पहले अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम (Qeshm) द्वीप स्थित सैन्य और संचार ठिकानों पर हमले किए।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े से जुड़े ठिकानों, एयरबेस और सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया। IRGC के मुताबिक यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई।
تتصدى حالياً الدفاعات الجوية الكويتية لهجمات صاروخية وطائرات مسيرة معادية.
تنوه رئاسة الأركان العامة للجيش أن أصوات الانفجارات إن سمعت فهي نتيجة اعتراض منظومات الدفاع الجوي للهجمات المعادية.
يرجى من الجميع التقيد بتعليمات الأمن والسلامة الصادرة عن الجهات المختصة.… pic.twitter.com/us5KIAGcih
— KUWAIT ARMY – الجيش الكويتي (@KuwaitArmyGHQ) June 2, 2026
ईरानी पक्ष का आरोप है कि अमेरिकी सेना ने इससे पहले केशम द्वीप पर एक संचार टावर पर हमला किया था। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी ऑयल टैंकर को भी निशाना बनाया गया, जिससे टैंकर के इंजन रूम को नुकसान पहुंचा। ईरान ने दावा किया कि जवाबी कार्रवाई में उसने एक जहाज पर मिसाइलें दागीं।
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हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के दावों को खारिज करते हुए कहा कि कुवैत और बहरीन की ओर दागी गई अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कुवैत की ओर दागी गई दो मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं, जबकि बहरीन की ओर बढ़ रही तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीनी रक्षा प्रणालियों ने इंटरसेप्ट कर लिया।
🚫 CLAIM: Iran’s Islamic Revolutionary Guard Corps claims they struck U.S. 5th Fleet headquarters in Bahrain and a U.S. air base in the region with missiles and drones today. FALSE.
✅ TRUTH: All Iranian attacks on American forces failed. U.S. forces remain vigilant and ready to… pic.twitter.com/KuYzaENUqI
— U.S. Central Command (@CENTCOM) June 2, 2026
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अलर्ट पर ला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो क्षेत्र में व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नजर बनाए हुए है और तनाव कम करने की अपील कर रहा है।
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