Lucknow Coaching Fire Update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण कोचिंग अग्निकांड ने प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मृतकों में 5 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं, जिनमें अधिकांश 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के छात्र बताए जा रहे हैं।
2016 में ही जारी हुआ था बिल्डिंग गिराने का आदेश
जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, वह अवैध बिल्डिंग थी। इस बिल्डिंग को वर्ष 2016 में गिराने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन बाद में यह कार्रवाई किसी कारणवश निरस्त कर दी गई और इमारत में गतिविधियां लगातार जारी रहीं।
इस खुलासे के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर वर्षों से विवादों में रही इमारत में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना संचालन की अनुमति कैसे दी गई।
बिल्डिंग मालिक समेत 4 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करते हुए बिल्डिंग मालिक और रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट कॉलेज के संचालक वीरेंद्र शुक्ला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
4 अधिकारी सस्पेंड, 16 अन्य पर कार्रवाई की तैयारी
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, बिल्डिंग को अनुमति देने और निगरानी में लापरवाही बरतने वाले 16 अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि बिल्डिंग मालिक को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर इमारत को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
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Lucknow, Uttar Pradesh: Morning visuals from the coaching centre fire site show smoke still rising from the affected building. Fire personnel are continuing cooling operations and working to extinguish remaining hotspots pic.twitter.com/Y1HucaU5xg
— IANS (@ians_india) June 23, 2026
फायर सेफ्टी की भारी कमी, नहीं था इमरजेंसी एग्जिट
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए अलग से कोई इमरजेंसी एग्जिट मौजूद नहीं था। हादसे के समय छत का दरवाजा भी बंद था, जिससे अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल सके।
अधिकारियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोगों की मौत दम घुटने के कारण हुई।
थंब इम्प्रेशन लॉक बना मौत का जाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ऑफिस का मुख्य गेट थंब इम्प्रेशन आधारित डिजिटल सिस्टम से संचालित होता था। आग लगने के बाद यह सिस्टम ऑटोमैटिक लॉक हो गया, जिससे लोगों को बाहर निकलने में देरी हुई और हालात और भयावह हो गए।
AC ब्लास्ट से शुरू हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे एयर कंडीशनर (AC) में ब्लास्ट होने के बाद आग तेजी से फैल गई। सूचना मिलने के लगभग 40 मिनट बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।
इसके बाद SDRF और NDRF की टीमों ने करीब 7 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। कई जगह दीवारें तोड़कर अंदर फंसे लोगों और शवों को बाहर निकाला गया।
कई राज्यों के लोगों की गई जान
मृतकों में उत्तर प्रदेश के 11 लोग शामिल हैं, जिनमें लखनऊ के 8, कानपुर के 2 और बाराबंकी का 1 व्यक्ति है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के 2 और मध्य प्रदेश तथा हरियाणा के 1-1 लोगों की भी मौत हुई है।
सुरक्षा मानकों पर उठे बड़े सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक इमारतों और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी की अनदेखी और वर्षों से लंबित कार्रवाई ने मिलकर इस त्रासदी को और भी भयावह बना दिया।
अब पूरे मामले में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
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