Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी की तेरहवीं सोमवार को बड़े स्तर पर आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में हजारों लोगों की मौजूदगी रही। तेरहवीं के दौरान भरत तिवारी के घर पर देशभक्ति गीत बजाए गए और श्रद्धांजलि सभा में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि पुलिस ने जो किया, वह सही किया।
तेरहवीं में उमड़ी हजारों की भीड़
परिजनों और आयोजकों के अनुसार, भरत तिवारी की तेरहवीं के अवसर पर करीब 25 हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। दावा किया गया कि लगभग 20 हजार लोग सामूहिक भोज और श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। कार्यक्रम में आसपास के गांवों के अलावा कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया।
देशभक्ति गीत और सरकार विरोधी नारे
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान भरत तिवारी के घर पर देशभक्ति गीत बजाए गए। सभा में मौजूद लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। इनमें “भ्रष्ट व्यवस्था मुर्दाबाद”, “बलिदानी लड़े थे गोरों से, हम लड़ेंगे कालों से”, “चारों तरफ अंधेरा है, पहरेदार लुटेरा है” और “शहीदों, हम शर्मिंदा हैं” जैसे नारे शामिल थे। कई लोगों ने भरत तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।
Arrah, Bihar: Shraddh ceremony of Bharat Tiwari, who was killed in a police encounter, is being organised today in Bilauti village of Bhojpur district pic.twitter.com/sqk3ht3GXb
— IANS (@ians_india) June 30, 2026
मां का बयान
भरत तिवारी की मां ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कम दिखाई देती है। उन्होंने अपने बेटे की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
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मांझी ने पुलिस कार्रवाई का किया बचाव
इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने पुलिस एनकाउंटर का समर्थन किया। उन्होंने कहा,
“अगर कोई मेरे ऊपर पिस्टल तान देगा तो मैं उसे कैसे छोड़ सकता हूं। पुलिस पर हथियार तानने वाले के खिलाफ कार्रवाई करना गलत नहीं है। पुलिस ने जो किया, वह सही किया।”
मांझी के इस बयान के बाद एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
भरत तिवारी की 17 जून को भोजपुर जिले में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे और वह पुलिस टीम पर हथियार से हमला करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
हालांकि, परिजनों और समर्थकों का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था। उनका कहना है कि भरत तिवारी की हत्या की गई और बाद में उसे मुठभेड़ का रूप दिया गया। परिवार लगातार इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
सियासी विवाद तेज
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक ओर परिजन और समर्थक पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार और उसके सहयोगी दल पुलिस के पक्ष में खड़े हैं। तेरहवीं में हुई भारी भीड़ और सरकार विरोधी नारों के बाद यह मामला अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।
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