‘हमारा पानी रोका तो हाथ काट देंगे’… पाकिस्तान की भारत को धमकी, भारत बोला- आतंकवाद नहीं रुका तो सिंधु जल संधि बहाल नहीं होगी

Pakistan India Water Dispute: पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ तीखी बयानबाज़ी की है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने खुले मंच से धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की तो “उन हाथों को काट देंगे।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को बहाल नहीं किया जाएगा।

इस्लामाबाद में सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुसादिक मलिक ने कहा कि भारत पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकना चाहता है। उन्होंने दावा किया कि पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) कहते हैं कि पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे। मलिक ने कहा कि जो भी पाकिस्तान के पानी पर दावा करेगा, उसे इसका जवाब दिया जाएगा।

पाकिस्तान का दावा- संधि अब भी लागू

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि अंतरराष्ट्रीय समझौता है और कानूनी रूप से अब भी प्रभावी है। उनके मुताबिक भारत इस संधि को न तो एकतरफा रद्द कर सकता है, न स्थगित कर सकता है और न ही इसमें बदलाव कर सकता है। पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी भी कर रहा है।

संधि पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार करेगा पाकिस्तान

पाकिस्तानी सरकार ने घोषणा की है कि इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें जल विशेषज्ञ, कानूनी विशेषज्ञ और कई विदेशी प्रतिनिधि शामिल होंगे। पाकिस्तान का कहना है कि वह इस संधि के कानूनी और तकनीकी पहलुओं को दुनिया के सामने रखेगा।

पहले भी दे चुका है युद्ध की धमकी

यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान ने पानी के मुद्दे पर आक्रामक बयान दिया हो। 21 जून को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि अगर पाकिस्तान की जल सुरक्षा खतरे में पड़ी तो भारत के खिलाफ युद्ध भी छेड़ा जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत पानी को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि हालिया घटनाक्रम की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है।

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भारत का रुख- आतंकवाद बंद करो, तभी होगी बात

भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। उस आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। भारत ने साफ कहा है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस, प्रभावी और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल करने का कोई सवाल नहीं उठता।

भारत का मानना है कि एक ओर पाकिस्तान आतंकवाद को रोकने में विफल रहा है, वहीं दूसरी ओर वह अंतरराष्ट्रीय समझौतों का हवाला देकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

क्या है सिंधु जल संधि?

भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने कराची में इस समझौते पर दस्तखत किए थे।

सिंधु नदी प्रणाली में कुल छह नदियां शामिल हैं—सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इन्हीं नदियों के जल बंटवारे को लेकर यह समझौता किया गया था, ताकि दोनों देशों के बीच पानी को लेकर विवाद न हो।

बंटवारे के बाद शुरू हुआ था विवाद

1947 में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद दोनों देशों के बीच नदियों के पानी को लेकर विवाद शुरू हो गया था। 1948 में अस्थायी समझौता समाप्त होने पर भारत ने कुछ नहरों का पानी रोक दिया था, जिससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में खेती प्रभावित हुई। इसके बाद विश्व बैंक की मध्यस्थता में लगभग नौ साल तक बातचीत चली और 1960 में सिंधु जल संधि अस्तित्व में आई।

पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है यह संधि?

पाकिस्तान की करीब 90 प्रतिशत कृषि भूमि सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर निर्भर है। देश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी है और करोड़ों लोगों की आजीविका इसी पर टिकी हुई है।

अगर पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है तो सिंचाई, खाद्यान्न उत्पादन, जलविद्युत परियोजनाओं, उद्योग और रोजगार पर व्यापक असर पड़ सकता है। पाकिस्तान के मंगल और तारबेला जैसे बड़े बांध भी इसी जल प्रणाली पर निर्भर हैं।

भारत का रुख साफ

भारत ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि का भविष्य अब केवल कानूनी दलीलों से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के आतंकवाद पर वास्तविक और ठोस कदमों से तय होगा। जब तक सीमा पार आतंकवाद पर निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, तब तक भारत अपने फैसले पर कायम रहने के संकेत दे चुका है।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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