राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन को मिली बड़ी जिम्मेदारी; ट्रस्ट ने कहा- दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। ट्रस्ट की अहम बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। वहीं, सेवानिवृत्त IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम (कार्यवाहक) महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रस्ट का कहना है कि चोरी के मामले में दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जांच पूरी होने तक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट की यह पहली औपचारिक बैठक थी, जो करीब तीन घंटे तक चली। बैठक में SIT की अंतरिम रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई और मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, प्रबंधन की कमियों तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर भी विचार किया गया।

चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए छोड़ा पद

बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि चंपत राय ने स्वयं कहा था कि जब तक चोरी के आरोपी कानून के शिकंजे में नहीं आते, तब तक उनका पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद और शर्मनाक बताते हुए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की। ट्रस्ट ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया।

ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य के. पाराशरन ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार किसी पदाधिकारी का त्यागपत्र मिलते ही उसे स्वीकार करने की प्रक्रिया निर्धारित है। इसी नियम के तहत चंपत राय का इस्तीफा मंजूर किया गया।

कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव

ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया है। कृष्ण मोहन दलित समाज से आते हैं और लंबे समय तक प्रशासनिक सेवाओं में कार्य कर चुके हैं।

नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी के मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने माना कि प्रबंधन की कुछ कमियों का फायदा उठाकर यह घटना हुई। अब ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के प्रति श्रद्धालुओं का जो विश्वास प्रभावित हुआ है, उसे फिर से मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी।

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22 जुलाई को होगी अगली अहम बैठक

ट्रस्ट ने घोषणा की है कि 22 जुलाई को फिर बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में SIT की जांच की प्रगति, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।

ट्रस्ट ने कहा- अंतिम फैसला जांच पूरी होने के बाद

कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि अभी SIT की केवल अंतरिम रिपोर्ट आई है। अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है। इसलिए इस समय किसी को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में अंतिम निर्णय जांच एजेंसी और न्यायालय ही करेंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट की ओर से किसी भी दोषी को बचाने की कोशिश नहीं की जाएगी। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होगी।

अनिल मिश्रा को लेकर बैठक में नहीं हुई अलग चर्चा

गोविंद देव गिरि ने बताया कि बैठक में डॉ. अनिल मिश्रा के संबंध में अलग से कोई चर्चा नहीं हुई। हालांकि उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया है।

वहीं, महंत कमल नयन दास ने बताया कि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की ओर से कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्टी गोपाल राव को इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था, जबकि चंपत राय भी बैठक में शामिल नहीं हुए। बाकी सभी ट्रस्टी बैठक में मौजूद रहे।

कांग्रेस ने उठाए कई सवाल

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने ट्रस्ट के फैसले पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफा स्वीकार करने से मामला खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

अजय राय ने मांग की कि मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर नई समिति गठित की जाए, जिसमें शंकराचार्यों, प्रमुख संतों और अयोध्या के उन लोगों को शामिल किया जाए जो वर्षों से भगवान राम की सेवा से जुड़े रहे हैं।

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सपा ने भी ट्रस्ट की जिम्मेदारी तय करने की मांग की

समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि मंदिर की सुरक्षा, चढ़ावे और संपत्ति की जिम्मेदारी ट्रस्ट की थी। ऐसे में चोरी की घटना के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं न कहीं पूरे मामले को भटकाने की कोशिश की जा रही है और वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास हो सकता है।

ट्रस्ट ने पेश किया दान और खर्च का पूरा ब्यौरा

बैठक के दौरान ट्रस्ट ने मंदिर को मिले दान और उसके उपयोग का विस्तृत विवरण भी सार्वजनिक किया।

ट्रस्ट के अनुसार, निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस डोनेशन के माध्यम से अब तक 3,264 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। इनमें से 2,370 करोड़ रुपए मंदिर निर्माण और अन्य पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च किए जा चुके हैं।

इसके अलावा, ट्रस्ट के गठन से लेकर 31 मार्च 2026 तक श्रद्धालुओं ने 582 करोड़ रुपए चढ़ावे के रूप में दान किए। इनमें से 391 करोड़ रुपए मंदिर के संचालन, रखरखाव और अन्य आवश्यक कार्यों में खर्च किए गए हैं, जबकि शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित रखी गई है।

सोने-चांदी के उपहारों का भी रखा गया पूरा रिकॉर्ड

ट्रस्ट ने बताया कि नकद दान के अलावा श्रद्धालुओं ने भगवान रामलला को 2,926 प्रकार के उपहार भेंट किए हैं। इनमें सोने और चांदी से बनी कई मूल्यवान वस्तुएं भी शामिल हैं। ट्रस्ट ने बैठक के दौरान उन चार सोने-चांदी की वस्तुओं को भी प्रस्तुत किया, जिनके चोरी होने का दावा किया गया था।

ट्रस्ट के अनुसार, सभी उपहारों का विस्तृत रिकॉर्ड रजिस्टर में सुरक्षित है और हर वर्ष स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा उनका भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया जाता है।

श्रद्धालु चाहें तो देख सकते हैं रिकॉर्ड

ट्रस्ट ने कहा कि यदि कोई श्रद्धालु अपने द्वारा दिए गए दान या उपहार के उपयोग की जानकारी लेना चाहता है, तो वह ट्रस्ट से समय लेकर अयोध्या आ सकता है और संबंधित रिकॉर्ड का अवलोकन कर सकता है।

जांच पूरी होने तक संयम बरतने की अपील

ट्रस्ट ने अंत में कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आएगी। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। ट्रस्ट ने भरोसा दिलाया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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