PM मोदी की पोस्ट हटाने पर Meta बैकफुट पर, जुकरबर्ग ने मांगी माफी; CSAM और डीपफेक पर भी मानी चूक

Meta PM Modi Post Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में Meta भारत सरकार के सामने बैकफुट पर आ गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने इस घटना पर भारत सरकार से माफी मांगी है। साथ ही कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि उसके प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM), डीपफेक और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मामलों में गंभीर कमियां रही हैं।

यह घटनाक्रम उस अहम बैठक के बाद सामने आया, जिसमें Meta की ग्लोबल टीम ने ग्लोबल अफेयर्स चीफ जोएल कैपलन के नेतृत्व में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए समन के जवाब में आयोजित की गई थी।

क्या था पूरा मामला?

23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर करीब 2 मिनट 56 सेकंड का वीडियो संदेश साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने NEET-UG पेपर लीक को देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया था।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के भविष्य से जुड़ी हैं और सरकार दोषियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी बताया था कि कम समय में 22 लाख छात्रों की परीक्षा दोबारा कराई गई और परिणाम भी घोषित किए गए।

इसके अलावा उन्होंने ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश देने की भी घोषणा की थी।

हालांकि, यह वीडियो पोस्ट फेसबुक से कुछ समय के लिए हटा दिया गया था। बाद में Meta ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए वीडियो को दोबारा प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया

सरकार ने जताई कड़ी नाराजगी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री का आधिकारिक वीडियो हटाए जाने को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया। इसके बाद Meta के अधिकारियों को तलब किया गया और कंपनी से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया।

बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि Meta खुद को केवल IT Act के तहत एक “इंटरमीडियरी” बताकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। सरकार का कहना था कि कंपनी अपने एल्गोरिद्म के जरिए यह तय करती है कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचे, इसलिए उसकी जिम्मेदारी केवल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है।

सरकार ने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई प्लेटफॉर्म कंटेंट की दृश्यता और पहुंच को नियंत्रित करता है, तो उसे IT Act के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर (Safe Harbour) सुरक्षा का स्वतः लाभ नहीं मिल सकता।

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Meta ने किन कमियों को स्वीकार किया?

बैठक के दौरान Meta ने माना कि उसके प्लेटफॉर्म पर कई क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। कंपनी ने स्वीकार किया कि

  • चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM) को रोकने के प्रयास पर्याप्त नहीं रहे।
  • डीपफेक कंटेंट की पहचान और उसे हटाने में कमियां सामने आई हैं।
  • कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम कई मामलों में अपेक्षित स्तर पर काम नहीं कर पाया।
  • कुछ प्रकार के कंटेंट को प्रमोट करने के लिए बड़े पैमाने पर धन खर्च किया गया, जिससे अवैध सामग्री को भी बढ़ावा मिला। हालांकि सूत्रों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह किस प्रकार के कंटेंट से संबंधित था।

इन मुद्दों पर भी सरकार ने मांगा जवाब

बैठक में सरकार ने Meta से कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर जवाब मांगा। इनमें शामिल हैं:

  • चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM) पर कार्रवाई
  • डीपफेक और AI आधारित फर्जी वीडियो की रोकथाम
  • वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा
  • एल्गोरिद्मिक पक्षपात (Algorithmic Bias)
  • भारतीय कानूनों और IT नियमों का पालन
  • कंटेंट मॉडरेशन की पारदर्शिता

सूत्रों के मुताबिक इन सभी मुद्दों पर आगे भी Meta के अधिकारियों को दोबारा बुलाया जा सकता है।

23 जुलाई को क्या बोले थे PM मोदी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई की रात जारी अपने वीडियो संदेश में कहा था कि

“पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। यह लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के लिए बेहद पीड़ादायक है। पिछले ढाई महीनों में सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। दोषियों को गिरफ्तार किया गया है और वे जेल में हैं। हमारी जिम्मेदारी थी कि छात्रों का साल बर्बाद न हो, इसलिए कम समय में 22 लाख छात्रों की परीक्षा कराई गई और समय पर परिणाम भी घोषित किए गए।”

उन्होंने आगे कहा था कि सरकार केवल दोषियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बनाए जाएंगे।

आगे क्या?

Meta की ओर से माफी और चूक स्वीकार किए जाने के बावजूद सरकार इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं दिख रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाए हुए है। आने वाले दिनों में Meta समेत अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नियामकीय निगरानी और कड़ी हो सकती है।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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