Nepal Glacial Flood Update: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ की चपेट में आकर बह गए 17 लोगों के शव उत्तर प्रदेश की गंडक नदी से बरामद किए गए हैं। इनमें 13 शव कुशीनगर की खड्डा और तमकुही राज तहसील से मिले हैं, जबकि चार शव महाराजगंज से बरामद हुए।
महाराजगंज में मिले चारों शवों की पहचान नहीं हो सकी है। इनमें तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। प्रशासन ने शवों के पोस्टमॉर्टम के दौरान DNA सैंपल सुरक्षित किए हैं, ताकि नेपाल में लापता लोगों के परिजनों के DNA से मिलान कर पहचान की जा सके।
नेपाल में 939 लोगों की मौत
बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल में अब तक 939 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 3,900 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। तिब्बत में हुई 16 मौतों को मिलाकर नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में मृतकों की संख्या 955 हो गई है।
लापता लोगों की तलाश के लिए नेपाल के कई हिस्सों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। बाढ़ के कारण हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की कई सुरंगें मलबे और कीचड़ से बंद हो गई हैं। इन सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारतीय और चीनी विशेषज्ञ भी अभियान में जुटे हैं।
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चीन ने 12 दिन पहले चेतावनी देने का किया दावा
बाढ़ से पहले मौसम और जलस्तर से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करने के आरोपों के बीच चीन ने अपना पक्ष रखा है। चीन का कहना है कि उसके वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने आपदा से 12 दिन पहले ही नेपाल को ईमेल भेजकर भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ के खतरे की जानकारी दी थी।
नेपाल की ओर से इससे पहले आरोप लगाया गया था कि उसे ग्लेशियरों की गतिविधियों, जलस्तर और संभावित प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी पर्याप्त जानकारी समय पर नहीं मिली। चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जरूरी जानकारी समय पर साझा की गई थी।
लापता लोगों की पहचान के लिए DNA जुटाया जा रहा
बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं होने के चलते नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिवारों से DNA सैंपल देने की अपील की है। परिजनों से लापता व्यक्ति को आखिरी बार कहां और किस समय देखा गया था, इसकी जानकारी भी मांगी जा रही है।
नेपाल से बाहर रहने वाले परिजनों से अपने देश में DNA प्रोफाइलिंग कराने और रिपोर्ट नेपाल पुलिस को भेजने को कहा गया है। इससे बरामद अज्ञात शवों की पहचान में मदद मिलने की उम्मीद है।
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी
नेपाल में बाढ़ के बाद कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में बड़ी मात्रा में मलबा और कीचड़ भर गया है। इसके चलते अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। रेस्क्यू टीमें भारी मशीनों और जरूरी तकनीकी उपकरणों की मदद से सुरंगों का रास्ता साफ करने में जुटी हैं।
करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं। आशंका है कि इनमें से कई कर्मचारी बाढ़ के दौरान सुरंगों के अंदर फंस गए। नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारतीय और चीनी विशेषज्ञ भी बचाव अभियान में मदद कर रहे हैं।
Nepal has intensified rescue efforts to free hundreds of people trapped inside tunnels at hydropower projects, including the Trishuli-3A site, following Wednesday’s flash floods.
Rescuers, including experts from India and China, are trying to make contact with those inside the… pic.twitter.com/RNnhAGzKrE
— All India Radio News (@airnewsalerts) August 31, 2026
नेपाल-चीन का अहम व्यापारिक रास्ता भी प्रभावित
बाढ़ ने नेपाल और चीन के बीच प्रमुख व्यापारिक मार्ग रासुवागढ़ी-केरुंग बॉर्डर को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ में सीमा चौकी, फ्रेंडशिप ब्रिज और तिमुरे का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।
@vantortech की नई तस्वीरों से पुष्टि होती है कि चीन-नेपाल रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग पूरी तरह से तबाह हो गई है, और ग्लेशियर से आई बाढ़ ने घाटी के तल को पूरी तरह से बहा दिया है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार कम से कम 359 लोगों की मौत हुई है और लगभग 1000 लोग लापता हैं। pic.twitter.com/JSC6nf4PRa
— Indian🇮🇳 (@singh31919) August 28, 2026
इस मार्ग के बंद होने से चीन से नेपाल आने वाले सामान की सप्लाई और कारोबार प्रभावित हुआ है।






