BRICS की इकोनॉमी अमेरिका से 3 गुना बड़ी: 10 साल बाद एक मंच पर दिखेंगे मोदी-पुतिन-जिनपिंग, 21 देशों के नेता होंगे शामिल

Brics Summit 2026: नई दिल्ली में शनिवार से BRICS समिट शुरू होने जा रहा है। भारत में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में करीब 10 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। इससे पहले तीनों नेता 2016 में गोवा में आयोजित BRICS समिट में एक साथ शामिल हुए थे।

इस सम्मेलन में BRICS के 11 सदस्य देशों के अलावा 10 पार्टनर देशों के नेता भी हिस्सा लेंगे। ऐसे में समिट में कुल 21 देशों की भागीदारी होगी। BRICS की ताकत सिर्फ इसके सदस्य देशों की संख्या में नहीं है, बल्कि आबादी और आर्थिक क्षमता के लिहाज से भी इसका प्रभाव काफी बड़ा है।

BRICS देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी

BRICS के 11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5% आबादी रहती है। यानी दुनिया के लगभग हर दो लोगों में से एक व्यक्ति BRICS देशों में रहता है।

आर्थिक ताकत की बात करें तो PPP यानी Purchasing Power Parity के आधार पर BRICS देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था दुनिया की करीब 39% है। यह आंकड़ा अमेरिका की अर्थव्यवस्था के मुकाबले करीब तीन गुना है।

PM मोदी की कई विदेशी नेताओं से होगी मुलाकात

BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

सुबह 10 बजे: हैदराबाद हाउस में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से मुलाकात।

सुबह 10:30 बजे: मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ बैठक।

सुबह 11 बजे: अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद से मुलाकात।

सुबह 11:30 बजे: वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक।

शाम 6 से 7 बजे: भारत मंडपम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है।

गलवान के बाद पहली बार भारत में आमने-सामने होंगे मोदी-जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी यह मुलाकात 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत में पहली आमने-सामने की बैठक होगी।

गलवान घटना के बाद करीब चार साल तक भारत और चीन के बीच LAC पर तनाव बना रहा। अब दोनों देश सीमा से लेकर कारोबार तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।

सीमा विवाद दोनों देशों के बीच सबसे अहम मुद्दों में शामिल है। दोनों देश सीमा विवाद को लेकर एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा सीमा पर दो अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र और पूर्वी तथा मध्य सेक्टर में दो सैन्य हॉटलाइन बनाने पर भी सहमति बनी है। अब इन फैसलों को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलनी है।

चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बड़ा मुद्दा

भारत और चीन के बीच कारोबार भी दोनों देशों के संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू है। 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 11.4 लाख करोड़ रुपए का सामान आयात किया। इससे चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 8.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा।

ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भी बातचीत का अहम मुद्दा हो सकता है।

ये भी पढ़ेंः G7 पर पुतिन का सीधा हमला: ‘पश्चिम अब पहले जैसा मजबूत नहीं’, मोदी ने व्यापार और सुरक्षित समुद्री रास्तों पर दिया जोर

BRICS में डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश

BRICS देश आपसी कारोबार में डॉलर के इस्तेमाल को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए सदस्य देशों के बीच उनकी अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

इसके साथ ही अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का कोई साझा पेमेंट सिस्टम या एक समान मुद्रा नहीं है।

भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस BRICS समिट में भी स्थानीय करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए।

इससे सदस्य देशों के बीच पैसे का लेन-देन आसान हो सकता है और हर अंतरराष्ट्रीय भुगतान में डॉलर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है BRICS

BRICS 11 देशों का समूह है, जिसमें दुनिया की कई बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं।

इस संगठन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ाना है।

शुरुआत में BRICS में सिर्फ चार देश शामिल थे और इसे BRIC कहा जाता था। BRIC नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने दिया था। बाद में दूसरे देश समूह से जुड़ते गए और इसका नाम BRICS हो गया।

भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है।

एक बैंक की रिपोर्ट से आया था BRICS नाम

BRICS की शुरुआत किसी सरकार या अंतरराष्ट्रीय संगठन की पहल से नहीं हुई थी। साल 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था।

इस रिपोर्ट में ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से आगे बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में बताया गया था।

उस समय BRIC कोई औपचारिक संगठन नहीं था। बाद में चारों देशों के बीच सहयोग बढ़ा। 2006 में BRIC समूह बना और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई।

2010 में दक्षिण अफ्रीका के समूह में शामिल होने के बाद BRIC का नाम BRICS हो गया। इसके बाद समूह का लगातार विस्तार हुआ और पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी इसके पूर्ण सदस्य बने।

आज BRICS दुनिया के प्रमुख आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की हिस्सेदारी करीब 14% है।

पाकिस्तान की कोशिश के बावजूद BRICS में नहीं मिली जगह

BRICS के विस्तार के बाद कई देशों ने संगठन में शामिल होने की इच्छा जताई। इनमें पाकिस्तान और तुर्किये भी शामिल थे।

पाकिस्तान ने 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए आधिकारिक आवेदन किया था। उसे चीन और रूस का समर्थन भी मिला, लेकिन अब तक पाकिस्तान BRICS का सदस्य नहीं बन सका है।

तुर्किये ने भी संगठन में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन उसे भी सफलता नहीं मिली। इसके बाद यह सवाल उठा कि दोनों देशों की सदस्यता क्यों अटकी हुई है।

कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भारत पाकिस्तान और तुर्किये को BRICS में शामिल करने के पक्ष में नहीं था। हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की सदस्यता रोकने की बात नहीं कही है।

BRICS में नए सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। ऐसे में किसी एक सदस्य देश की आपत्ति भी सदस्यता के रास्ते में बाधा बन सकती है।

ये भी पढ़ेंः गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आएंगे शी जिनपिंग, BRICS में पुतिन से भी होगी मुलाकात; PM मोदी से बैठक संभव

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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