US Tariff on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही यह कानून बन गया है। कानून के तहत ट्रंप को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है। भारत भी रूस के बड़े तेल खरीदारों में शामिल है।
भारत पर 100% टैरिफ तुरंत लागू नहीं
कानून बनने के बाद भारत पर सीधे 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति देता है। वास्तविक दर, किन देशों और किन उत्पादों पर टैरिफ लगाया जाएगा, इसका फैसला अमेरिकी प्रशासन करेगा।
कानून के अनुसार, रूस के तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदारों से आने वाले सामान पर टैरिफ लगाया जा सकता है। भारत और चीन इस प्रावधान के तहत प्रमुख रूप से प्रभावित होने वाले देशों में हैं।
हाउस और सीनेट में पहले ही पास हो चुका था बिल
ट्रंप के हस्ताक्षर से पहले यह बिल अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका था। सीनेट ने इसे 86-11 वोट से मंजूरी दी थी, जबकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 262-159 वोट से इसे पास किया। इसके बाद 18 सितंबर को ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए।
रूस से तेल खरीदना भारत के लिए क्यों अहम?
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी बढ़ाई। रूस भारत के प्रमुख क्रूड ऑयल सप्लायरों में शामिल हो गया है। ऐसे में अमेरिका की ओर से रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
अगर अमेरिकी प्रशासन भारत पर टैरिफ लागू करता है, तो अमेरिका को निर्यात होने वाले भारतीय सामान की लागत बढ़ सकती है। इसका असर उन भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है जिनका अमेरिकी बाजार में कारोबार है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव टैरिफ की दर, उसके दायरे और लागू होने वाले उत्पादों पर निर्भर करेगा।
भारत के सामने तेल खरीद के दूसरे विकल्प
भारत रूस के अलावा इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, अमेरिका, नाइजीरिया, ब्राजील और दूसरे देशों से भी कच्चा तेल खरीदता है। रूस से खरीद कम करने की स्थिति में भारत इन बाजारों से आयात बढ़ा सकता है।
हालांकि, इससे तेल की खरीद लागत बढ़ेगी या नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, सप्लाई, माल ढुलाई और रुपये-डॉलर विनिमय दर जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कितना पड़ेगा।
रूस के ‘शैडो फ्लीट’ पर भी कार्रवाई
नए कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ उसके ‘शैडो फ्लीट’ को भी निशाना बनाया गया है। शैडो फ्लीट में ऐसे टैंकर और उनसे जुड़े नेटवर्क शामिल हैं, जिनके जरिए रूस प्रतिबंधों के बावजूद तेल की अंतरराष्ट्रीय बिक्री जारी रखता है। कानून रूस के अधिकारियों, बैंकों और उसकी ऊर्जा एवं रक्षा व्यवस्था से जुड़े संस्थानों पर भी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाता है।
ईरान पर भी बढ़ेगा प्रतिबंधों का दायरा
यह कानून केवल रूस तक सीमित नहीं है। इसके तहत अमेरिका के ईरान सैंक्शन एक्ट को भी पांच साल के लिए आगे बढ़ाया गया है। यानी रूस के साथ-साथ ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को भी जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है।
भारत के लिए आगे क्या?
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि कानून बन चुका है, लेकिन भारत पर 100% टैरिफ लगने का अलग से फैसला अभी बाकी है। अमेरिकी प्रशासन को कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करना होगा और यह तय करना होगा कि भारत पर कितना टैरिफ और किन वस्तुओं पर लगाया जाए।
इसलिए आपकी खबर में “भारत पर 100% टैरिफ लागू” लिखने के बजाय “भारत पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ” या “100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिला” लिखना तथ्यात्मक रूप से ज्यादा सटीक रहेगा।
ये भी पढ़ेंः TMC सिंबल विवाद: ममता ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, बोलीं- EC कैसे मेरी पार्टी का सिंबल फ्रीज कर सकता है?






