US Airstrikes on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। गुरुवार को अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान परमाणु समझौते को लेकर बातचीत में देरी कर रहा है, इसलिए उस पर दबाव बनाए रखना जरूरी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य निगरानी नेटवर्क और संचार ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि ये ठिकाने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बलों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए खतरा पैदा कर रहे थे। CENTCOM ने कहा कि फिलहाल सैन्य अभियान पूरा हो चुका है, लेकिन अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
DEAFENING MISSILES ERUPT from US VESSELS as CENTCOM drops footage of STRIKES on IRANIAN TARGETS pic.twitter.com/lYIox7bPjq
— RT (@RT_com) June 11, 2026
वहीं, ईरानी मीडिया ने केश्म द्वीप, बंदर अब्बास, मीनाब और सीरिक समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों की खबर दी है। कई स्थानों पर एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय किया गया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलों में टॉमहॉक मिसाइलों और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया।
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अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स और नौसेना ने दो चरणों में कार्रवाई करते हुए 18 अहम अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।
हालांकि, ईरान ने यह नहीं बताया कि किन-किन ठिकानों पर हमला किया गया और कितना नुकसान हुआ। दूसरी ओर, अमेरिका ने भी ईरान के इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
इस बीच, ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों के लिए बंद करने का दावा किया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्र में समुद्री यातायात सामान्य रूप से जारी है।
पिछले दो दिनों में दोनों देशों के बीच लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो क्षेत्र एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।
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