Vande Mataram controversy Tamil Nadu: तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण समारोह के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। शपथ समारोह में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ के प्रस्तुति क्रम को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है, जिसने राज्य की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए थे, लेकिन समारोह की शुरुआत और समापन में गीतों के क्रम को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
शपथ समारोह में क्या हुआ?
शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ से हुई, जिसे इस बार पारंपरिक दो छंदों की बजाय पूरे छह छंदों के साथ प्रस्तुत किया गया। इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया गया और अंत में तमिलनाडु का राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ प्रस्तुत किया गया। यही क्रम अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह राज्य की पारंपरिक व्यवस्था के विपरीत है।
CPI का विरोध, परंपरा पर सवाल
एम वीरपांडियन ने इस पूरे आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि तमिलनाडु के सरकारी कार्यक्रमों की परंपरा के अनुसार शुरुआत राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ से होती है और अंत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ किया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार प्रोटोकॉल को बदलकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई है। साथ ही उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों का हवाला देते हुए इसके उपयोग पर भी सवाल उठाए।
VCK ने भी मांगा जवाब
VCK ने भी इस मामले में सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की है। पार्टी का कहना है कि राज्य गीत को तीसरे स्थान पर रखना तमिल पहचान और सांस्कृतिक परंपरा के खिलाफ है। VCK नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा केवल संगीत क्रम का नहीं, बल्कि राज्य की अस्मिता और संवैधानिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।
गठबंधन सरकार पर असर
TVK को विधानसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और उसे कांग्रेस, CPI, CPM और अन्य सहयोगी दलों का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में शपथ समारोह के तुरंत बाद उठा यह विवाद गठबंधन के भीतर असंतोष का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विवाद बढ़ता है, तो सरकार के शुरुआती दिनों में ही समन्वय की चुनौती सामने आ सकती है।
‘वंदे मातरम्’ पर राष्ट्रीय बहस भी तेज
देशभर में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है। दरअसल, पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने का निर्णय लिया है, जिसके बाद देश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
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मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस संशोधन के बाद बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को वही संवैधानिक और कानूनी दर्जा मिलेगा, जो अब तक राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है। इसका अर्थ है कि दोनों के लिए समान नियम और पाबंदियां लागू होंगी।
वर्तमान में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने पर जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। अब इस संशोधन के बाद ‘वंदे मातरम्’ को भी इसी सूची में शामिल किया जाएगा। इसके किसी भी प्रकार के अपमान या बाधा को संज्ञेय अपराध माना जाएगा, जिस पर कानूनी कार्रवाई संभव होगी।
150वीं वर्षगांठ के बीच बड़ा फैसला
देश इस समय ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। ऐसे समय में सरकार के इस फैसले को सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय भावनाओं और देशभक्ति की भावना को मजबूत करेगा।
हालांकि, इस फैसले के तुरंत बाद देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कुछ दलों ने इसे राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला कदम बताया है, जबकि कई विपक्षी नेताओं ने इसके कानूनी और संवैधानिक प्रभावों पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का कहना है कि इससे नए विवाद और संवेदनशील बहसें और बढ़ सकती हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि ‘वंदे मातरम्’ को उसका उचित सम्मान मिला है।
इसी माहौल के बीच विजय के शपथ समारोह में हुआ यह विवाद अब केवल एक औपचारिक आयोजन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह परंपरा, पहचान और राजनीतिक संदेशों की टकराहट बन चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद राज्य की गठबंधन राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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