India US Sea Conflict: हिंद महासागर क्षेत्र और ओमान की खाड़ी में हुई एक सैन्य कार्रवाई ने भारत और अमेरिका के बीच नए विवाद को जन्म दे दिया है। अमेरिकी सेना की कार्रवाई में भारतीय नाविकों की मौत की खबर सामने आने के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। घटना के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मांगी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 10 जून को ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना ने एक मालवाहक जहाज के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। इस कार्रवाई में जहाज पर मौजूद तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि अन्य भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया।
⚡️ 🇺🇸 CENTCOM Confirms Strike on Commercial Tanker Off Oman Coast – Claims ‘Disabled Non-Compliant Vessel’
Three Indian crew are reportedly missing following the strike, the 🇮🇳 MEA stated earlier.
📹: CENTCOM https://t.co/SJx3JKhj0Z pic.twitter.com/JYfYpeO6vn
— RT_India (@RT_India_news) June 10, 2026
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि संबंधित जहाज ईरान की ओर जा रहा था और उस पर लागू प्रतिबंधों तथा नाकेबंदी नियमों का उल्लंघन कर रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की गई।
हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि जहाज पर भारतीय नागरिक मौजूद थे और घटना में उनकी जान चली गई।
अमेरिका का क्या कहना है?
अमेरिका का कहना है कि हमला किसी भारतीय ध्वज वाले जहाज पर नहीं बल्कि MT Marivex नामक जहाज पर किया गया था, जो विदेशी पंजीकरण वाला पोत था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि उनका उद्देश्य किसी भारतीय जहाज को निशाना बनाना नहीं था।
अमेरिका के अनुसार जहाज पर मौजूद 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। हालांकि बाद में हुई एक अन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हुई, जिससे विवाद और गहरा गया।
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भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी विदेश विभाग के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम ओमान के तट के पास एक जहाज पर हुए हमले की निंदा करते हैं, जिसमें दुर्भाग्यवश हमने अपने तीन भारतीय नागरिकों को खो दिया। हमने इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए भारत में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी (CDA) को तलब किया था।”
We condemn the attack on a ship off the coast of Oman in which, unfortunately, we lost three Indian nationals. We had summoned the US CDA here to register a strong protest: MEA Spox Randhir Jaiswal pic.twitter.com/sHqDvkI7Lh
— Sidhant Sibal (@sidhant) June 11, 2026
विदेश मंत्रालय के इस बयान से साफ है कि भारत सरकार इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रही है। भारत ने अमेरिका से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मांगी है और मृतक भारतीय नागरिकों के परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। साथ ही, सरकार सुरक्षित बचाए गए भारतीय क्रू सदस्यों को जल्द से जल्द स्वदेश लाने की प्रक्रिया में जुटी हुई है।
पीड़ित परिवारों के साथ सरकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने मृतक नाविकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा सुरक्षित बचाए गए भारतीय क्रू सदस्यों को जल्द से जल्द भारत वापस लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट?
ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के कारण यह क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में किसी व्यापारी जहाज पर सैन्य कार्रवाई न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री कानूनों को लेकर भी सवाल खड़े करती है।
क्या भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना दोनों देशों के लिए संवेदनशील मुद्दा है। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत है, लेकिन भारतीय नागरिकों की मौत के कारण इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है। भारत इस मामले में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही चाहता है, जबकि अमेरिका अपने पक्ष को स्पष्ट करने की कोशिश कर रहा है।
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