US Senate Iran Proposal: अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया है। यह प्रस्ताव 50-48 वोटों से पास हुआ है। इससे पहले प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) भी इसे मंजूरी दे चुकी है।
1973 के वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद यह पहला मौका है, जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति से सैन्य अभियान खत्म करने की मांग की है। वोटिंग के दौरान चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का समर्थन किया, जिससे ट्रंप की पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद भी सामने आए हैं।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस प्रस्ताव को प्रतीकात्मक करार देते हुए कहा है कि इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं पड़ेगा और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है।
खाड़ी देशों को मनाने UAE पहुंचे रूबियो
इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत के दौरे पर पहुंचे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर खाड़ी देशों की चिंताओं को दूर करना है।
खाड़ी देशों को आशंका है कि यदि समझौता होता है तो होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव बढ़ सकता है। इसके अलावा प्रस्तावित समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर स्पष्ट शर्तें नहीं होने से भी क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड पर चर्चा
अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता में ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के संभावित फंड पर भी चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि इस फंड के लिए खाड़ी देशों से आर्थिक सहयोग लिया जा सकता है। इसी वजह से वॉशिंगटन अपने क्षेत्रीय सहयोगियों का समर्थन जुटाने में लगा है।
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बातचीत आगे बढ़ने से तेल की कीमतों में गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने की संभावना से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 0.5% गिरकर 76.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होने और तेल आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद से निवेशकों की चिंता कम हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना है।
ईरान बोला- मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं होगा
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने साफ कहा है कि अमेरिका के साथ हुए 14 सूत्रीय समझौते में मिसाइल कार्यक्रम शामिल नहीं है और भविष्य में भी इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं होगी।
इस्लामाबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “हमारी मिसाइलों पर कोई चर्चा नहीं हुई है और न ही आगे होगी। ईरान की मिसाइल क्षमता देश की सुरक्षा का अहम आधार है।”
ट्रंप की चेतावनी- परमाणु जांच नहीं हुई तो बातचीत खत्म
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि उसने अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच नहीं कराई तो अमेरिका उसके साथ जारी बातचीत समाप्त कर देगा।
पेंसिल्वेनिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पहले ही इस शर्त पर सहमत हो चुका है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अधिकारी उचित समय पर ईरान पहुंचकर उसके परमाणु कार्यक्रम की निगरानी करेंगे।
ईरान का दावा- अब जरूरत पड़ी तो पहले हमला भी करेंगे
ईरानी सेना के वरिष्ठ कमांडर अहमद रजा पूरदस्तान ने कहा है कि देश ने अपनी सैन्य नीति में बड़ा बदलाव किया है। अब ईरान केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर पहले हमला भी कर सकता है।
फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने रक्षात्मक रणनीति से आगे बढ़कर आक्रामक सैन्य सिद्धांत (ऑफेंसिव डॉक्ट्रिन) अपनाया है। पूरदस्तान ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताओं का बड़ा हिस्सा अभी तक इस्तेमाल ही नहीं किया गया है और देश लेबनान की सुरक्षा के लिए भी पूरी तरह तैयार है।
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