Petrol-Diesel Price Hike: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में 3-3 रुपए प्रति लीटर तक इजाफा किया है। नई कीमतें 15 मई से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है, क्योंकि ईंधन महंगा होने से परिवहन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका है।
राजधानी दिल्ली में अब पेट्रोल ₹97.77 प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि पहले इसकी कीमत ₹94.77 थी। वहीं डीजल ₹87.67 से बढ़कर ₹90.67 प्रति लीटर हो गया है। कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में भी कीमतों में करीब 3 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है।
क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल है। पिछले कुछ हफ्तों में पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा है। खासतौर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है।
जानकारों के मुताबिक, युद्ध जैसे हालात बनने से दुनिया भर में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
तेल कंपनियों पर बढ़ रहा था आर्थिक दबाव
सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से बढ़ती लागत और स्थिर खुदरा कीमतों के कारण नुकसान झेल रही थीं। सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ रहा था।
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बताया गया कि कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब ₹20 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹100 प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर कंपनियों को हर महीने करीब ₹30 हजार करोड़ का घाटा उठाना पड़ रहा था। ऐसे में कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया।


2024 के बाद पहली बड़ी बढ़ोतरी
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से लगभग स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले केंद्र सरकार ने जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके बाद लंबे समय तक दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया।
हालांकि भारत में ईंधन की कीमतें तकनीकी रूप से डेली प्राइसिंग सिस्टम के तहत तय होती हैं। यानी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले 15 दिनों के औसत क्रूड ऑयल रेट और डॉलर-रुपया विनिमय दर के आधार पर रोज कीमतें बदल सकती हैं। लेकिन राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखी गई थीं।
आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
पेट्रोल और डीजल महंगे होने का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से सब्जियों, फल, दूध, किराना और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। बस, ट्रक और टैक्सी किराए पर भी असर पड़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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