Trump Pauses Project Freedom: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट मिशन रोकना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने 3 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को निकालने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया था। यह ऑपरेशन अमेरिकी सेना की निगरानी में चलाया जा रहा था। हालांकि महज 48 घंटे के भीतर ही ट्रम्प प्रशासन ने इसे रोकने का ऐलान कर दिया।
NBC रिपोर्ट में बड़ा दावा
अमेरिकी मीडिया NBC न्यूज के मुताबिक ट्रंप ने इस ऑपरेशन की घोषणा अचानक सोशल मीडिया पर कर दी थी। इससे खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब की लीडरशिप नाराज हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी विमानों को एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मंजूरी देने से इनकार कर दिया।

बताया जा रहा है कि ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। अमेरिका इस मिशन के दौरान सिर्फ 3 जहाजों को सुरक्षित निकाल पाया और आखिरकार ऑपरेशन रोकना पड़ा।
क्या था ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ का मकसद होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों की आवाजाही बहाल कराना था। उस समय ईरान की ओर से समुद्री नाकाबंदी और तनाव लगातार बढ़ रहा था। अमेरिकी मिशन के जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
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रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरान यूएई पर हमले हुए और सऊदी अरब पर भी संभावित हमले की आशंका जताई गई थी। इसी वजह से खाड़ी देशों ने युद्ध के विस्तार को लेकर चिंता जाहिर की।
ट्रंप पर ‘यू-टर्न’ के आरोप
ईरान संघर्ष को लेकर ट्रंप प्रशासन पर लगातार यू-टर्न लेने के आरोप लग रहे हैं। पहले ट्रम्प ने दावा किया था कि अमेरिकी हमलों से ईरान में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। बाद में उन्होंने कहा कि ईरान से सीजफायर पर कोई बातचीत नहीं होगी, लेकिन फिर बातचीत की संभावना भी जताई गई।

इसके बाद होर्मुज मिशन शुरू हुआ, जिसे दो दिन के भीतर ही रोक दिया गया। अब अमेरिकी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि यह फैसला सऊदी दबाव और खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं के चलते लिया गया।
सऊदी का संदेश- जंग नहीं, समझौता चाहिए
रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने अमेरिका से साफ कहा कि यदि क्षेत्रीय युद्ध बढ़ता है तो सबसे ज्यादा नुकसान खाड़ी देशों को होगा। इसलिए सऊदी नेतृत्व ने सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और समझौते पर जोर दिया।
बाद में ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि ईरान से बातचीत की संभावना की वजह से ऑपरेशन रोका गया। हालांकि अब अमेरिकी मीडिया इसे सऊदी दबाव से जोड़कर देख रहा है।
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