West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के हारने के बाद ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बागी नेता ऋतब्रता बनर्जी ने दावा किया है कि उनके साथ 60 विधायक हैं और विधानसभा अध्यक्ष ने उनके समूह को विधायक दल के रूप में मान्यता दे दी है। इसके बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना नेता संजय निरुपम ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस लगभग टूट चुकी है और बड़ी संख्या में विधायक अलग रास्ता चुन चुके हैं।
‘तानाशाही रवैये का नतीजा है बगावत’
संजय निरुपम ने कहा, “जब कोई नेता या व्यक्ति जीत और सफलता के अहंकार में तानाशाही रवैया अपनाता है, तो उसके साथ काम करने वाले लोग सही मौके की तलाश में रहते हैं। जैसे ही पार्टी चुनाव हारी, ममता दीदी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आ गया।”
उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष था, जो अब विधानसभा के भीतर खुले विद्रोह के रूप में दिखाई दे रहा है।
Mumbai, Maharashtra: Shiv Sena spokesperson Sanjay Nirupam says, “Mamata Banerjee’s party Trinamool Congress has almost broken apart, it has disintegrated. Today in the Assembly, about 58 MLAs of her party have submitted a signed request to the Speaker of the Assembly that they… pic.twitter.com/GBxNLCdX0y
— IANS (@ians_india) June 3, 2026
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ऋतब्रत बनर्जी ने क्या कहा?
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने बागी समूह के विधायक दल के दर्जे के दावे को स्वीकार कर लिया है। उनके अनुसार, जावेद खान, संदीपान साहा, सबीना यास्मीन और शिउली साहा विधायक दल के उपनेता होंगे।
उन्होंने कहा, “हम बंगाल सरकार की उन नीतियों का विरोध करेंगे जो हमें सही नहीं लगतीं, लेकिन केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करेंगे।”
‘हम ही असली विपक्ष’
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि संसदीय परंपराओं के अनुसार उनका समूह ही विधानसभा में वास्तविक और मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाएगा। साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी से विधायक दल के मुख्य सलाहकार की भूमिका निभाने का आग्रह भी किया।
वहीं, टीएमसी विधायक अखरुज्जमान ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता के चयन की प्रक्रिया में पार्टी नेतृत्व ने निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया।
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