Tej Pratap Statement: बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान के बाद अब राबड़ी देवी के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख Tej Pratap Yadav ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने दावा किया कि सम्राट चौधरी अगले 8 से 9 महीनों में खुद मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे।
क्या कहा था सम्राट चौधरी ने?
सरकारी आवास विवाद पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिना किसी का नाम लिए कहा था कि “सरकारी आवास किसी की बपौती नहीं है। पद छोड़ने के बाद उसे खाली करना ही होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सरकारी संपत्ति पर किसी परिवार का स्थायी अधिकार नहीं हो सकता और कुछ लोग अलग-अलग परिवार के सदस्यों के लिए अलग सरकारी आवास चाहते हैं।
Patna, Bihar: On CM Samrat Choudhary, Janshakti Janata Dal, National President Tej Pratap Yadav says, “… We know that he is the Chief Minister. The whole country knows that on which chair Samrat Choudhary is sitting. We also want to say that the chair he is sitting on, at least… pic.twitter.com/frs0dUJnQX
— IANS (@ians_india) June 2, 2026
तेज प्रताप का पलटवार
सम्राट चौधरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री की भाषा मर्यादित नहीं थी। उन्होंने कहा कि जिस संवैधानिक पद पर सम्राट चौधरी बैठे हैं, उस पद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
तेज प्रताप ने कहा,
“हम भविष्यवाणी करते हैं कि 8 से 9 महीने में सम्राट चौधरी खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर जाएंगे। इस तरह की अमर्यादित भाषा का प्रयोग लोकतंत्र में किसी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता।”
नीतीश कुमार को भी घेरा
तेज प्रताप यादव ने इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री नितीश कुमार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकारी आवास खाली कराने के नियम लागू किए जा रहे हैं तो फिर अन्य पूर्व मंत्रियों और नेताओं पर समान नियम क्यों नहीं लागू किए जा रहे।
उन्होंने कहा कि अगर नियम सबके लिए समान हैं तो सबसे पहले उन नेताओं पर कार्रवाई होनी चाहिए जो लंबे समय से सरकारी आवासों का उपयोग कर रहे हैं।
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राबड़ी देवी के पक्ष में क्या बोले तेज प्रताप?
तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनकी मां राबड़ी देवी वर्तमान में सदन की सदस्य हैं। ऐसे में उनका आवास खाली कराने की कार्रवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चयनात्मक तरीके से नियम लागू कर रही है।
उन्होंने कहा, “मेरी मां आज भी सदन की सदस्य हैं। अगर नियम एक व्यक्ति पर लागू हो रहा है तो वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।”
क्यों बढ़ा विवाद?
दरअसल, राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने के अल्टीमेटम के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष इसे सरकारी नियमों का पालन बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और गर्मा सकता है।
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