TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी कलह गहराती नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल में 58 विधायकों की बगावत के बाद अब पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के बीच भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। इसी बीच पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी रविवार को दिल्ली पहुंचीं, जहां उन्होंने इंडिया गठबंधन को मजबूत करने और पार्टी के भीतर बढ़ते संकट को संभालने की कोशिशें तेज कर दी हैं।
टीएमसी सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसद पार्टी से अलग होकर नया गुट बनाने की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी के संसदीय दल में नए नेतृत्व की मांग भी उठ रही है। बताया जा रहा है कि कोलकाता में विधायकों द्वारा अपनाए गए मॉडल को अब संसद में दोहराने की रणनीति बनाई जा रही है।
टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि लोकसभा में विभाजन की संभावना वास्तविक है और इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उनका दावा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में जो घटनाक्रम हुआ, वैसा ही लोकसभा में भी देखने को मिल सकता है। हालांकि राज्यसभा में अभी इस दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
केजरीवाल से मिलीं ममता
दिल्ली दौरे के दौरान ममता बनर्जी ने अपने भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। बैठक में विपक्षी एकजुटता और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हुई। टीएमसी ने कहा कि 2029 के चुनावों को लेकर विपक्षी दलों के बीच समन्वय पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
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सांसदों की संख्या और बागियों का दावा
फिलहाल टीएमसी के लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। बागी खेमे का दावा है कि उनके साथ करीब 20 सांसद हैं। यदि यह संख्या सही साबित होती है तो संसदीय दल में बड़ा विभाजन संभव हो सकता है। हालांकि पार्टी नेतृत्व का कहना है कि उसके साथ कम से कम 16 सांसद मजबूती से खड़े हैं, जिससे बागियों के लिए दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई समर्थन जुटाना मुश्किल हो जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संपर्क कर सकते हैं। पार्टी नेतृत्व इस संभावित कदम को रोकने के लिए लगातार सांसदों के संपर्क में है।
अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी
टीएमसी के भीतर असंतोष का एक बड़ा कारण अभिषेक बनर्जी को माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जिन विधायकों ने हाल में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोला था, उनमें से कई की नाराजगी अभिषेक से जुड़ी थी। अब सांसदों के एक वर्ग में भी इसी तरह की नाराजगी सामने आ रही है। पार्टी को आशंका है कि यदि यह असंतोष और बढ़ा तो संसदीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है।
फिलहाल ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में टीएमसी की अंदरूनी राजनीति राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा असर डाल सकती है।
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