Pakistan Israel Recognition: पाकिस्तान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह इजराइल को देश के रूप में मान्यता नहीं देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की अपील के बीच पाकिस्तान ने अपने पुराने रुख को दोहराया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान अपनी मूल विचारधारा और फिलिस्तीन के समर्थन से कोई समझौता नहीं करेगा।
ख्वाजा आसिफ बोले- पाकिस्तान का रुख बिल्कुल साफ
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान उन लोगों के साथ नहीं बैठ सकता जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दुनिया के शायद उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिसके पासपोर्ट पर साफ लिखा होता है कि यह इजराइल के लिए मान्य नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि पाकिस्तान के इस रुख में कोई बदलाव नहीं आने वाला।
आसिफ का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका पश्चिम एशिया में नए राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश में जुटा है और मुस्लिम देशों पर इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने का दबाव बढ़ रहा है।
ट्रंप ने मुस्लिम देशों से की थी रिश्ते सुधारने की अपील
दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में कई मुस्लिम देशों से अपील की थी कि वे अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करें। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान से भी कहा गया था कि अगर वह अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया में बड़ी भूमिका चाहता है, तो उसे इजराइल को मान्यता देने पर विचार करना होगा।
ट्रंप का मानना है कि इजराइल और अरब देशों के बीच रिश्ते बेहतर होने से पश्चिम एशिया में स्थिरता आएगी और आर्थिक सहयोग बढ़ेगा। हालांकि पाकिस्तान ने इस दिशा में कोई नरम संकेत नहीं दिया है।
पाकिस्तान के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा
पाकिस्तान लंबे समय से खुद को फिलिस्तीन समर्थक देश के रूप में पेश करता रहा है। वहां आम जनता के बीच फिलिस्तीन का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक और भावनात्मक रूप से भी बेहद अहम माना जाता है। यही वजह है कि पाकिस्तान में इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने का मुद्दा हमेशा घरेलू राजनीति से जुड़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, लेकिन वह अपनी घरेलू राजनीति और कट्टरपंथी दबावों को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता। किसी भी सरकार के लिए इजराइल पर नरम रुख अपनाना राजनीतिक जोखिम माना जाता है।
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78 साल में कभी नहीं दी इजराइल को मान्यता
पाकिस्तान ने पिछले 78 वर्षों में कभी भी इजराइल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान का आधिकारिक रुख यह रहा है कि जब तक 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं होती, तब तक वह इजराइल को मान्यता नहीं देगा।
इसी नीति के तहत पाकिस्तान ने अब तक इजराइल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं।
ट्रंप की रणनीति क्या है
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप पश्चिम एशिया में एक नया अमेरिकी समर्थक गठबंधन तैयार करना चाहते हैं, जिसमें इजराइल और प्रमुख अरब देश एक साथ हों। इसी रणनीति के तहत 2020 में अब्राहम समझौते अस्तित्व में आया था।
इस समझौते के तहत संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मोरक्को जैसे देशों ने इजराइल के साथ आधिकारिक संबंध स्थापित किए थे। बाद में स,सूडान ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया।
ट्रंप बोले- समझौते से देशों को बड़ा फायदा हुआ
ट्रंप ने दावा किया कि अब्राहम समझौते से जुड़े देशों को आर्थिक, व्यापारिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह समझौता पश्चिम एशिया को स्थिरता, शांति और आर्थिक मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
उन्होंने सऊदी अरब और कतर से भी इस समझौते में शामिल होने की अपील की और कहा कि बाकी मुस्लिम देशों को भी आगे आना चाहिए।
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