पहलगाम हमले की पहली बरसी: ‘हम नहीं भूलेंगे’ – भारत के साथ मजबूती से खड़ा इजरायल

Pahalgam Attack Anniversary: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया। 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में हुए इस नरसंहार ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। पहली बरसी पर भारत एक बार फिर शोक, संकल्प और सख्त संदेश के साथ खड़ा नजर आया। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनकी याद आज भी देश के दिल में जिंदा है।

पीएम मोदी का संदेश: ‘देश नहीं भूलेगा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर भावुक संदेश जारी करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि पहलगाम के पीड़ितों को कभी भुलाया नहीं जा सकता और पूरा देश उनके परिवारों के साथ खड़ा है।

https://x.com/i/status/2046770966685163989

पीएम ने साफ कहा कि भारत आतंकवाद के सामने कभी नहीं झुकेगा और दोषियों को हर हाल में सजा मिलेगी।

इजरायल का साथ: आतंक के खिलाफ एकजुटता

पहलगाम हमले की बरसी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के समर्थन में आवाजें उठीं। भारत में इजरायल के राजदूत रूविन अज़ार ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में इज़रायल भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ साझा मोर्चा बनाने पर जोर बढ़ रहा है।

भारतीय सेना की चेतावनी: ‘न्याय जरूर होगा’

भारतीय सेना ने भी इस मौके पर सख्त संदेश दिया। सेना ने कहा कि देश के खिलाफ की गई हर हरकत का जवाब दिया जाएगा और आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन महादेव’ से जुड़ी तस्वीर साझा करते हुए सेना ने लिखा

“यह सिर्फ समय की बात थी”, जो आतंकियों के खात्मे की ओर इशारा करता है।

क्या हुआ था पहलगाम में?

22 अप्रैल 2025 को ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले बैसरन घाटी में आतंकवादियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया। हमलावरों ने लोगों की पहचान पूछकर उन्हें अलग किया और फिर बेरहमी से गोलियां चला दीं। इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय टट्टू चालक की मौत हुई, जिसने लोगों को बचाने की कोशिश की थी।

यह घटना हाल के वर्षों में सबसे क्रूर आतंकी हमलों में से एक मानी जाती है। कई पीड़ित नवविवाहित थे, जिन्हें उनके परिवार के सामने बेहद करीब से गोली मारी गई। इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, जिसे पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा माना जाता है।

ऑपरेशन महादेव: 93 दिन में आतंक का खात्मा

हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन महादेव’ नाम दिया गया। दाचीगाम और महादेव रिज के दुर्गम इलाकों में चले इस अभियान में करीब 93 दिनों तक लगातार तलाशी ली गई।

करीब 300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चलाए गए इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने हमले के तीन मुख्य आतंकियों को मार गिराया। यह ऑपरेशन भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और सख्त कार्रवाई का प्रतीक बन गया।

ऑपरेशन सिंदूर: सीमा पार जवाब

पहलगाम हमले के बाद भारत ने सीमा पार भी आतंक के खिलाफ कार्रवाई की। 6 और 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।

यह ऑपरेशन बेहद सटीक और रणनीतिक था, जिसका उद्देश्य केवल आतंकी ढांचे को ध्वस्त करना था। इस कार्रवाई से आतंकवादी नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और सीजफायर

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने ड्रोन हमलों और गोलाबारी के जरिए जवाब देने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने हर हमले को नाकाम कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने नागरिक इलाकों को निशाना बनाया, जिसका भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया।

आखिरकार भारी नुकसान के बाद पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा और 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी।

आतंकवाद पर भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

पहलगाम हमले और उसके बाद की कार्रवाई ने एक बार फिर साफ कर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलता है। देश अब हर हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। चाहे वह देश के भीतर हो या सीमा पार।

दर्द के साथ मजबूत संकल्प

एक साल बाद भी पहलगाम हमले का दर्द लोगों के दिलों में ताजा है। पीड़ित परिवार आज भी अपने अपनों को याद कर रहे हैं। लेकिन इस दुख के बीच देश का संकल्प और भी मजबूत हुआ है।

पहलगाम की यह बरसी सिर्फ शोक नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है। भारत न तो भूलता है और न ही आतंक के सामने झुकता है।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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