“सुपर अल नीनो” लाएगा बंपर तबाही, भीषण गर्मी से टूटेंगे सारे पिछले “रिकॉर्ड”

Global Warming: 2026 में भारत समेत पूरी दुनिया पर सुपर अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके बनने की संभावना 62 से 80 प्रतिशत तक है। इससे पहले 1997-98 और 2015-16 में आए सुपर अल नीनो ने वैश्विक स्तर पर भारी तबाही मचाई थी, जिसमें ऑस्ट्रेलिया से लेकर पश्चिम एशिया तक सूखा, बाढ़ और महंगाई का गंभीर असर देखने को मिला था। इस बार भी हालात चिंताजनक माने जा रहे हैं।

क्या है अल नीनो: मौसम का असामान्य खेल

अल नीनो एक प्राकृतिक मौसम चक्र है, जिसमें सामान्य स्थिति के मुकाबले प्रशांत महासागर का संतुलन बिगड़ जाता है। आमतौर पर तेज हवाएं गर्म पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की ओर धकेलती हैं और दक्षिण अमेरिका के पास ठंडा पानी ऊपर आता है, लेकिन अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी मध्य व पूर्वी प्रशांत में फैल जाता है। इससे दुनिया भर का मौसम पैटर्न बदल जाता है, जिसके कारण कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा लंबे समय तक बना रहता है।

सुपर अल नीनो: ज्यादा खतरनाक रूप

जब समुद्र की सतह का तापमान औसत से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसे सुपर अल नीनो कहा जाता है। यह सामान्य अल नीनो से कहीं ज्यादा ताकतवर होता है। जहां सामान्य अल नीनो हर 2 से 7 साल में आता है और तापमान 0.5 से 1.5 डिग्री तक बढ़ाता है, वहीं सुपर अल नीनो 10 से 15 साल में एक बार आता है और तापमान 2 से 2.5 डिग्री तक बढ़ा सकता है। इसका असर भी कई गुना ज्यादा खतरनाक होता है।

कैसे बदलता है मौसम: वैश्विक असर

सुपर अल नीनो के दौरान गर्म समुद्री पानी के ऊपर हवा तेजी से उठती है, जिससे कुछ इलाकों में भारी बारिश होती है, जबकि हिंद महासागर और अफ्रीका के हिस्सों में हवा नीचे गिरती है, जिससे वहां सूखा और भीषण गर्मी बढ़ जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ तूफान, बाढ़, सूखा और हीटवेव जैसी चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिलती हैं।

भारत पर प्रभाव: गर्मी और मानसून पर मार

भारत के लिए 2026 का सुपर अल नीनो कई तरह की चुनौतियां लेकर आ सकता है। सबसे बड़ा असर गर्मी पर पड़ेगा, जहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच सकता है और मार्च-अप्रैल से ही लू चलने लगेगी। रातों का तापमान भी सामान्य से काफी ज्यादा रहेगा। इसके साथ ही मानसून कमजोर पड़ सकता है, क्योंकि अल नीनो के वर्षों में भारत में बारिश कम होती है और सुपर अल नीनो इसे गंभीर सूखे में बदल सकता है।

खेती और अर्थव्यवस्था: डबल झटका

इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा, खासकर खरीफ फसलों जैसे धान पर। जलाशयों में पानी की कमी हो सकती है, जिससे न सिर्फ किसानों बल्कि वन्यजीवों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ेगी और फसल उत्पादन कम होने से खाने-पीने की चीजों की कीमतों में उछाल आ सकता है।

मानसून 2026: महीने-दर-महीना संकेत

मौसम एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक जून 2026 में मानसून सामान्य (करीब 101 प्रतिशत) रह सकता है और इसकी शुरुआत समय पर होने की संभावना है, लेकिन जुलाई में 10 से 15 दिनों का ड्राई स्पेल आ सकता है, जिससे धान की रोपाई प्रभावित होगी। अगस्त में स्थिति और खराब हो सकती है, जहां बारिश घटकर लगभग 92 प्रतिशत रह सकती है और यही सुपर अल नीनो का पीक समय होगा। सितंबर में बारिश और कम होकर करीब 89 प्रतिशत रह सकती है और मानसून की जल्दी विदाई के संकेत मिल सकते हैं। कुल मिलाकर मानसून सामान्य से 6 से 8 प्रतिशत कम रहने की संभावना है, और बारिश का पैटर्न असंतुलित रहेगा—कुछ दिनों में तेज बारिश और फिर लंबे समय तक सूखा।

बचाव के उपाय: समय रहते तैयारी जरूरी

ऐसे हालात में बचाव बेहद जरूरी हो जाता है। किसानों को सूखा सहने वाली फसलें अपनानी चाहिए, जून में जल्दी बुवाई करनी चाहिए और पानी बचाने के आधुनिक तरीकों जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर का इस्तेमाल करना चाहिए। फसल बीमा योजना में शामिल होना भी जरूरी है ताकि नुकसान की भरपाई हो सके। आम लोगों को भी हीटवेव से बचने के लिए दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए, हल्के कपड़े पहनने चाहिए और शरीर में पानी की कमी न होने दें। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग और बिजली बचत जैसे कदम भी जरूरी होंगे।

सरकारी तैयारी: संकट से निपटने की रणनीति

सरकार के स्तर पर जलाशयों का सही प्रबंधन, पीने के पानी को प्राथमिकता, बिजली ग्रिड की तैयारी और सोलर ऊर्जा व कोयले का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा। कुल मिलाकर, 2026 का सुपर अल नीनो केवल मौसम की घटना नहीं बल्कि एक बड़ा आर्थिक और सामाजिक संकट बन सकता है, जिससे निपटने के लिए समय रहते तैयारी करना ही सबसे बड़ा उपाय है।

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Prem Upadhyay

प्रेम उपाध्याय न्यूज प्लस लाइव में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे मार्च 2026 से संगठन की डिजिटल विंग के साथ जुड़े हुए हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रणनीति व निष्पादन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, प्रेम ने लाइव इंडिया, 4 रियल न्यूज और फोकस टीवी जैसे विभिन्न न्यूज चैनलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने क्राइम, बिजनेस, डिफेंस, राजनीति और मनोरंजन जैसे विविध बीट्स पर गहन रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। वे तथ्य-आधारित पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्ध हैं और खबरों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए स्रोतों की गहन जांच व तथ्यों के सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

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