ममता को बड़ा झटका! TMC के 20 सांसद NDA के साथ, स्पीकर को सौंपा समर्थन पत्र

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी राजनीतिक संकट और गहरा गया है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने NDA सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है। सांसदों ने इस संबंध में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर अलग संसदीय समूह के रूप में बैठने की मांग भी की है।

TMC की पूर्व नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को दावा किया कि 20 सांसदों ने NDA को समर्थन देने का फैसला किया है और इसकी जानकारी स्पीकर को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सांसदों के बीच विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।

शताब्दी रॉय के घर हुई बागी सांसदों की बैठक

PTI के मुताबिक, TMC सांसद शताब्दी रॉय के आवास पर बागी सांसदों की बैठक हुई। बैठक में जून मालिया, बापी हलदर, अबू ताहिर खान और असित कुमार मल समेत कई सांसद मौजूद रहे। इस दौरान बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी सांसदों से मिलने पहुंचे।

इससे पहले सोमवार दोपहर 11 सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की थी। वहां भी शुभेंदु अधिकारी ने सांसदों से मुलाकात की।

लोकसभा में TMC के फिलहाल 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। इससे पहले 3 जून को पश्चिम बंगाल के 80 में से 58 विधायकों के अलग गुट बनाने का दावा सामने आया था। इस गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था।

देर रात हुई बैठक की तस्वीर आई सामने

PTI के अनुसार, रविवार देर रात दिल्ली के एक अज्ञात स्थान पर TMC के 20 सांसदों की अनौपचारिक बैठक हुई थी। बैठक में पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर असंतोष जताया गया।

सोमवार को इस बैठक की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई, जिसमें कई सांसद एक टेबल के आसपास बैठे दिखाई दिए। बताया गया कि बैठक के दौरान फोटो खींचे जाने को लेकर कुछ सांसदों के बीच बहस भी हुई थी। तस्वीर में राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे भी नजर आए।

सुखेंदु शेखर ने छोड़ी पार्टी और राज्यसभा सदस्यता

TMC के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे ने सोमवार सुबह राज्यसभा सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। अपने त्यागपत्र में उन्होंने ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासन पर सवाल उठाते हुए इसे पार्टी की मौजूदा स्थिति का कारण बताया और भाजपा की तारीफ की।

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राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सुखेंदु शेखर का कार्यकाल 2029 तक था। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उनकी सीट रिक्त हो गई है, जिस पर अब उपचुनाव कराया जा सकता है।

इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर कई नेता ममता बनर्जी की कार्यशैली से नाराज हैं और पार्टी मनमाने ढंग से चलाई जा रही थी।

ऋतब्रत बोले- सुखेंदु की बात काफी हद तक सही

TMC के बागी विधायक और अलग गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि सुखेंदु शेखर की बातें काफी हद तक सही हैं। उन्होंने कहा कि संसद कोई क्विज खेलने की जगह नहीं है और राज्यसभा के कामकाज को लेकर सुखेंदु की चिंताएं जायज हैं।

इस बीच, TMC ने विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के स्पीकर के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले में अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है।

काकोली घोष बोलीं- मैं अब भी चीफ व्हिप हूं

काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि वह अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों ने सामूहिक रूप से NDA का समर्थन करने का निर्णय लिया है और उनका मानना है कि यही जनता के जनादेश के अनुरूप है।

काकोली घोष 27 मई को TMC छोड़ चुकी हैं, हालांकि उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया था।

महुआ मोइत्रा का बागी सांसदों पर हमला

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर बागी सांसदों पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि 2024 में इन सांसदों को TMC के टिकट पर जनता ने चुना था और यह जनादेश NDA के लिए नहीं था।

उन्होंने सांसद यूसुफ पठान का नाम लेते हुए कहा कि यदि वह दिल्ली जा रहे हैं तो जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करें। महुआ ने कहा कि जिले की जनता ने उन्हें भारी बहुमत से जिताया है और उन्हें जनता के विश्वास का सम्मान करना चाहिए।

इससे पहले 4 जून को एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ममता बनर्जी, सौरव गांगुली के जरिए यूसुफ पठान पर सांसद पद छोड़ने का दबाव बना रही हैं। हालांकि 6 जून को सौरव गांगुली और यूसुफ पठान दोनों ने इन दावों को खारिज कर दिया था।

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