परमाणु बम से भी ज्यादा असरदार हथियार ईरान के पास? जंग के बाद और ताकतवर हुआ तेहरान, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का दावा

Iran Powerful After US War: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने को लेकर 16 जून को दोनों देशों के बीच डिजिटल साइन हो चुके हैं और 19 जून (शुक्रवार) को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने बाकी हैं। इसी बीच अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के साथ हुए युद्ध के बाद ईरान पहले से ज्यादा ताकतवर बनकर उभरा है और उसके पास ऐसा खतरनाक हथियार आ गया है, जिसे कई मामलों में परमाणु हथियार से भी ज्यादा ताकतवर माना जा रहा है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि अब ईरान किसी भी समय दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला तेल भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप समेत कई देशों तक इसी मार्ग से पहुंचता है।

अगर ईरान इस समुद्री रास्ते को बंद करता है तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

संभावित असर

  • वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
  • पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं।
  • वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
  • कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है।
  • ऊर्जा संकट गहरा सकता है।

परमाणु बम से भी ज्यादा ताकतवर क्यों माना जा रहा है यह खतरनाक हथियार?

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कोई नया सैन्य हथियार नहीं, बल्कि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने की क्षमता है। उनका मानना है कि वैश्विक तेल सप्लाई पर नियंत्रण या उसे बाधित करने की क्षमता कई परिस्थितियों में परमाणु हथियार से भी ज्यादा ताकतवर साबित हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर परमाणु वार्ता विफल होती है तो ईरान, यमन के हूती विद्रोहियों के जरिए बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में भी संकट पैदा कर सकता है। ऐसे में दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग एक साथ प्रभावित हो सकते हैं।

ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद

अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक शांति समझौते को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ इस समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। इन नेताओं का मानना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किए गए सभी वादों का पालन करेगा या नहीं, इस पर अभी भरोसा नहीं किया जा सकता और भविष्य में तेहरान समझौते की शर्तों से पीछे भी हट सकता है।

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वहीं, ट्रंप प्रशासन के कुछ वरिष्ठ नेता कूटनीतिक समाधान को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का मानना है कि सैन्य टकराव की बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए ही पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते संघर्ष से क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक संकट गहरा सकता है, इसलिए संवाद के माध्यम से समाधान निकालना सबसे बेहतर विकल्प होगा।

ट्रंप ने नेतन्याहू पर भी उठाए सवाल

G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जरूरत से ज्यादा लंबी खींची जा रही है।

ट्रंप ने कहा कि किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए पूरी अपार्टमेंट बिल्डिंग को गिराना उचित नहीं है, क्योंकि वहां रहने वाले सभी लोग हिजबुल्लाह से जुड़े नहीं होते। उन्होंने यह भी कहा कि कभी स्थिर माना जाने वाला लेबनान अब बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुका है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला समझौता सफल नहीं होता, तो पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और आम लोगों की जेब पर भी सीधा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता और पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति पर बनी रहेगी।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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