लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: 15 की मौत, ज्यादातर छात्र; इमरजेंसी एग्जिट नहीं था, CM योगी ने रद्द किए सभी कार्यक्रम, जांच के आदेश

Lucknow Coaching Fire: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर हुआ भीषण अग्निकांड पूरे देश को झकझोर गया। एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में ज्यादातर छात्र और युवा कर्मचारी शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इमारत में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे और इमरजेंसी एग्जिट भी मौजूद नहीं था, जिसके कारण कई लोग बाहर नहीं निकल सके और धुएं में दम घुटने से उनकी मौत हो गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए 23 जून के अपने सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

कैसे हुआ हादसा?

यह हादसा सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे अलीगंज स्थित उषा मेहता मार्ग के बी/2 सेक्टर-डी इलाके में हुआ। जिस इमारत में आग लगी, उसके बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहले तल पर पेट शॉप और क्लीनिक संचालित थे। दूसरे तल पर “लर्निंग स्पेस” नाम की लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर चल रहा था। इसी मंजिल पर “हेड हॉपर स्टूडियो” नाम का एक कार्यालय भी था, जहां 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम होता था।

घटना के समय इमारत में बड़ी संख्या में छात्र और कर्मचारी मौजूद थे।

AC ब्लास्ट और शॉर्ट सर्किट की आशंका

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बेसमेंट में लगे एयर कंडीशनर (AC) में ब्लास्ट हुआ, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। कुछ ही मिनटों में धुआं पूरी इमारत में भर गया, जिससे लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया।

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि एसी में विस्फोट के बाद आग तेजी से फैली और धुएं ने पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया।

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जान बचाने के लिए बाथरूम में छिपे छात्र

आग फैलने के बाद कई छात्र और कर्मचारी घबरा गए। कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया, लेकिन वहां धुआं भर जाने के कारण उनका दम घुट गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ लोगों ने खिड़कियों और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई।

एक छात्र जयंत ने ऊंचाई से छलांग लगा दी, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई और फ्रैक्चर हो गया।

ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम बना जानलेवा

हादसे में जान गंवाने वाले 23 वर्षीय सुखमणि के दोस्त यश ने बताया कि 3D एनीमेशन ऑफिस का मुख्य गेट थंब इंप्रेशन से खुलता था। आग लगने के दौरान ऑटोमैटिक लॉक समय पर नहीं खुल पाया, जिससे कई लोग अंदर फंस गए।

इस तकनीकी व्यवस्था ने लोगों के बाहर निकलने में देरी कर दी और हादसा और ज्यादा भयावह हो गया।

फायर ब्रिगेड, SDRF और NDRF ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 19 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। SDRF और NDRF की टीमों ने भी राहत और बचाव अभियान शुरू किया।

रेस्क्यू टीमों को इमारत की पिछली दीवार तोड़कर अंदर फंसे लोगों और शवों को बाहर निकालना पड़ा।

कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया।

एंबुलेंस कम पड़ गईं, डिप्टी CM ब्रजेश पाठक भावुक हुए

हादसे के दौरान मृतकों और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की संख्या कम पड़ गई।

घटनास्थल पर मौजूद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने शव निकलते देखे हैं और यह बेहद दर्दनाक दृश्य था।

उन्होंने बताया कि रात में ही पोस्टमार्टम कराने की व्यवस्था की गई है और घायलों का बेहतर इलाज कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रद्द किए सभी कार्यक्रम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ का अपना दौरा बीच में ही समाप्त कर दिया और तुरंत लखनऊ पहुंच गए। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और इसके बाद KGMU ट्रॉमा सेंटर जाकर घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा,

“इस घटना में जिम्मेदार किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

इमारत में नहीं था इमरजेंसी एग्जिट

शुरुआती जांच में सामने आया है कि इमारत में इमरजेंसी एग्जिट नहीं था। इसी वजह से आग लगने के बाद लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का पर्याप्त समय और रास्ता नहीं मिल पाया।

यह भी सामने आया है कि यह इमारत मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत थी, लेकिन बाद में इसे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा।

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इमारत के मालिक और अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी

जानकारी के अनुसार, यह इमारत वीरेंद्र शुक्ला की जमीन पर बनी है। आवासीय नक्शा वीरेंद्र शुक्ला, धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला के नाम पर स्वीकृत हुआ था।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2014 में इसका व्यावसायिक उपयोग शुरू हुआ और नगर निगम वर्ष 2022 से इस भवन से कमर्शियल टैक्स भी वसूल रहा था।

मामले में तत्कालीन अधिकारियों और इंजीनियरों समेत 16 लोगों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

विपक्ष ने सरकार से पूछे सवाल

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इस घटना पर दुख जताते हुए सरकार और प्रशासन से सवाल पूछे हैं।

उन्होंने कहा कि आखिर बिना फायर एनओसी और फायर एग्जिट वाली इमारत कैसे संचालित हो रही थी। उन्होंने कहा कि हर बार ऐसी घटनाओं पर कुछ दिनों तक चर्चा होती है और फिर मामला ठंडा पड़ जाता है।

वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब सरकार में मंत्री अमन अरोड़ा ने भी घटना को बेहद दुखद बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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