Iran NATO Conflict: ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ सैन्य कार्रवाई में सहयोग देने वाले NATO सदस्य देशों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, होर्मुज स्ट्रेट में एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहाज पर ड्रोन हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि ईरान ने NATO देशों और अमेरिका पर क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया है।
NATO देशों पर ईरान का बड़ा आरोप
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर कहा कि NATO महासचिव मार्क रूटे के बयान से यह स्पष्ट हुआ है कि इटली और रोमानिया जैसे कुछ NATO सदस्य देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में सहयोग दिया था।
बघई ने कहा कि इन देशों को दुनिया और अपने नागरिकों को बताना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। उन्होंने कहा कि ऐसे देशों को इस भूमिका के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाज पर हमला
इसी बीच ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ। ब्रिटेन की UK समुद्री व्यापार संचालन (UKMTO) के अनुसार किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने जहाज के दाहिने हिस्से को निशाना बनाया, जिससे जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा।
हालांकि इस हमले में किसी भी चालक दल के सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं है। नुकसान के बावजूद जहाज अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा।
ट्रंप का दावा- ईरान ने दागे चार ड्रोन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे एक कमर्शियल जहाज पर कम से कम चार ड्रोन दागे। उनके अनुसार तीन ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया गया, जबकि एक ड्रोन जहाज से टकरा गया, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा।
ट्रंप ने कहा कि यदि यह हमला ईरान ने किया है तो यह दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सीजफायर तोड़ना बेहद गंभीर गलती होगी।
खाड़ी देशों को ईरान की चेतावनी
ईरान ने खाड़ी देशों को भी अमेरिका का समर्थन न करने की चेतावनी दी है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वहां से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में ईरान की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि ईरान को नजरअंदाज कर इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती और किसी वैकल्पिक व्यवस्था से स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।
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लेबनान में इजराइल का नया निकासी आदेश
दक्षिणी लेबनान के अल-मंसूरी कस्बे में इजराइली सेना ने पर्चे गिराकर लोगों से तुरंत इलाका खाली करने को कहा है। युद्धविराम लागू होने के बाद यह पहली बार है जब इजराइल ने इस तरह का सार्वजनिक निकासी आदेश जारी किया है।
यह इलाका उन सीमावर्ती क्षेत्रों के पास स्थित है जहां अभी भी इजराइली सैनिक तैनात हैं। ऐसे में युद्धविराम के बावजूद सीमा पर तनाव बना हुआ है।
रूस ने दिया समझौते को समर्थन
रूस ने कहा है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाता है तो वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में उसे मंजूरी दिलाने वाले प्रस्ताव का समर्थन करेगा।
दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता के बाद एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी है।
हिजबुल्लाह का दो टूक संदेश
हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि इजराइल को लेबनान की सभी कब्जाई गई जमीन बिना किसी शर्त के खाली करनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिजबुल्लाह किसी भी स्थिति में इजराइल के साथ संबंध सामान्य नहीं करेगा।
कासिम ने कहा कि इजराइल को अंततः लेबनान से पीछे हटना ही पड़ेगा और यही क्षेत्र में स्थायी शांति की पहली शर्त होगी।
मध्य पूर्व में फिर बढ़ा तनाव
ईरान के NATO देशों पर लगाए गए आरोप, होर्मुज स्ट्रेट में जहाज पर हमला, ट्रंप के ड्रोन हमले संबंधी दावे और लेबनान-इजराइल सीमा पर बढ़ती गतिविधियों ने एक बार फिर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता जारी है, लेकिन ताजा घटनाक्रम से युद्धविराम और क्षेत्रीय स्थिरता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
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