PM Modi Sukhbir Badal Meeting: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं। शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने नई दिल्ली में संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में उनसे करीब 40 से 45 मिनट तक मुलाकात की। इस मुलाकात ने पंजाब की सियासत में हलचल तेज कर दी है और भाजपा (BJP) व अकाली दल के बीच एक बार फिर गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, पंजाब विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने का समय बचा है। ऐसे में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। हालांकि, भाजपा और अकाली दल की ओर से गठबंधन को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
Delhi: Shiromani Akali Dal President Sukhbir Singh Badal left after meeting Prime Minister Narendra Modi pic.twitter.com/NHtDA1VRoA
— IANS (@ians_india) August 7, 2026
पहले हरियाणा CM नायब सैनी से भी मिले बादल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात से पहले सुखबीर सिंह बादल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात की। इसके बाद दिल्ली में हुई राजनीतिक बैठकों ने गठबंधन की अटकलों को और मजबूत कर दिया।
केजरीवाल का तंज
प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा,
“ना-ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे… तो क्या चंदा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?”
केजरीवाल का यह बयान तेजी से राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे।
तो क्या चन्दा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?
Sukhbir Singh Badal meets PM Modi at Parliament House; key discussions underway | Punjab – PTC News https://t.co/xlpm2l5UZ8
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 7, 2026
सुखबीर बादल का पलटवार
केजरीवाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखबीर सिंह बादल ने AAP सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने दावा किया था कि पंजाब में फल-फूल रहे 20,000 करोड़ रुपए के अवैध खनन को सत्ता में आते ही बंद कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश ने साबित कर दिया है कि सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरी। बादल ने आरोप लगाया कि AAP की गारंटी पूरी तरह विफल रही है।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
“मुझे पहले से ही लगता था कि भाजपा और अकाली दल फिर साथ आएंगे। लेकिन इससे कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। टूटी हुई बाजू फिर जुड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह पहले जैसी मजबूत नहीं होगी।”
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25 साल तक साथ रहे भाजपा और अकाली दल
भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन वर्ष 1996 में हुआ था और लगभग 25 वर्षों तक कायम रहा। इसे पंजाब की राजनीति के सबसे सफल गठबंधनों में गिना जाता है।
इस गठबंधन ने वर्ष 1997, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में सरकार बनाई। खास बात यह रही कि 2012 में गठबंधन ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी कर इतिहास रच दिया। इससे पहले पंजाब में कोई भी सरकार लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में नहीं लौटी थी।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अक्सर भाजपा-अकाली गठबंधन को “नाखून और त्वचा” जैसा रिश्ता बताते थे, जिसका अर्थ होता है ऐसा संबंध जिसे अलग करना मुश्किल हो।
गठबंधन की सफलता की तीन बड़ी वजहें
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा-अकाली गठबंधन की सफलता के पीछे कई अहम कारण रहे।
पहली वजह दोनों दलों का अलग-अलग मजबूत वोट बैंक था। अकाली दल की पकड़ ग्रामीण और पंथक क्षेत्रों में थी, जबकि भाजपा शहरी हिंदू मतदाताओं के बीच मजबूत मानी जाती थी।
दूसरी वजह सीट बंटवारे का संतुलित फॉर्मूला था। गठबंधन के तहत अकाली दल लगभग 94 सीटों और भाजपा 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। इससे दोनों दल अपने मजबूत क्षेत्रों पर फोकस कर पाते थे और वोटों का बंटवारा नहीं होता था।
तीसरी वजह कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल था। दोनों दलों के समर्थक एक-दूसरे के उम्मीदवारों का भी समर्थन करते थे, जिससे चुनावी लाभ मिलता था।
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2020 में टूटा गठबंधन
सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध के दौरान शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद दोनों दलों का 25 साल पुराना राजनीतिक गठबंधन समाप्त हो गया।
2022 चुनाव में दोनों को हुआ नुकसान
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा और अकाली दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे। इसका सीधा असर दोनों दलों के प्रदर्शन पर पड़ा और दोनों का जनाधार बंट गया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा फायदा आम आदमी पार्टी को मिला, जिसने भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई। वहीं कांग्रेस भी अपने पारंपरिक वोट बैंक को पूरी तरह बचाने में सफल नहीं रही।
क्या फिर साथ आएंगे भाजपा और अकाली?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर भाजपा और शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर गठबंधन करते हैं तो पंजाब का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है। इससे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
हालांकि, अभी तक दोनों दलों की ओर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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