बारिश-लैंडस्लाइड के चलते अमरनाथ यात्रा 20 दिन पहले बंद, 9 अगस्त से नए जत्थों पर रोक; 4.8 लाख ने किए दर्शन

Amarnath Yatra Closed: खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण अमरनाथ यात्रा को इस साल निर्धारित समय से करीब 20 दिन पहले रोकने का फैसला लिया गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए 9 अगस्त से नए जत्थों को यात्रा पर भेजने पर रोक लगा दी है। हालांकि, जो श्रद्धालु पहले से यात्रा मार्ग पर हैं, उनकी यात्रा पूरी कराई जाएगी।

अब तक 4.8 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।

खराब मौसम के चलते लिया गया फैसला

कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग के मुताबिक, मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर यात्रा मार्ग प्रभावित हुए हैं और भूस्खलन की घटनाओं से रास्तों पर जोखिम बढ़ गया है।

इसी को देखते हुए प्रशासन ने पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों पर 9 अगस्त से नए श्रद्धालुओं की यात्रा रोकने का फैसला किया है। प्रशासन की प्राथमिकता यात्रा मार्गों पर मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाना और उनकी वापसी सुनिश्चित करना है।

यात्रा पर जाने वाले नए जत्थे नहीं भेजे जाएंगे

यात्रा के लिए निर्धारित कार्यक्रम के तहत श्रद्धालुओं के नए जत्थे लगातार भेजे जा रहे थे, लेकिन मौसम की स्थिति को देखते हुए अब नए जत्थों को रोक दिया जाएगा।

जो यात्री पहले से यात्रा पर हैं, उनके लिए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां आवश्यक व्यवस्थाएं करेंगी। रास्तों की स्थिति और मौसम में सुधार के आधार पर आगे की परिस्थितियों का आकलन किया जाएगा।

4.8 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

अमरनाथ यात्रा में इस साल भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अब तक 4.8 लाख से ज्यादा लोग पवित्र अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन, पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे।

28 अगस्त को होना था यात्रा का समापन

इस साल अमरनाथ यात्रा का निर्धारित समापन 28 अगस्त को होना था। लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सामान्य यात्रा को करीब 20 दिन पहले ही रोक दिया गया है।

हालांकि, यात्रा का धार्मिक समापन परंपरागत तरीके से ही होगा। 28 अगस्त को छड़ी मुबारक की परंपरा निभाई जाएगी। पवित्र छड़ी को पारंपरिक पहलगाम मार्ग से अमरनाथ गुफा तक ले जाया जाएगा और इसके साथ अमरनाथ यात्रा-2026 का औपचारिक धार्मिक समापन माना जाएगा।

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हिमलिंग भी समय से पहले पिघल गया था

इस साल बाबा अमरनाथ की गुफा में बनने वाला प्राकृतिक हिमलिंग भी मौसम और तापमान में बदलाव के कारण समय से पहले पिघल गया था।

23 मई को BSF की ओर से जारी तस्वीरों में हिमलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट बताई गई थी। इसके बाद 29 जून को पहली पूजा के दौरान इसकी ऊंचाई 5 फीट से अधिक बताई गई।

लेकिन जुलाई के शुरुआती दिनों में इसमें तेजी से बदलाव देखने को मिला। 6 जुलाई की तस्वीरों में हिमलिंग का करीब 90 फीसदी हिस्सा गायब दिखाई दिया, जबकि 7 जुलाई को इसके पूरी तरह गायब होने की खबर सामने आई।

इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और यात्रा जारी रही।

प्राकृतिक रूप से बनता है बाबा बर्फानी का हिमलिंग

अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग किसी बर्फ के टुकड़े को काटकर या तराशकर नहीं बनाया जाता। यह प्राकृतिक रूप से बनने वाला आइस स्टैलेग्माइट है।

गुफा की छत से पानी की बूंदें नीचे गिरती हैं। बेहद कम तापमान में ये बूंदें जमती जाती हैं और धीरे-धीरे बर्फ की परतें जमा होने से शिवलिंग जैसी आकृति बनती है। तापमान, पानी की मात्रा और मौसम की परिस्थितियों के कारण इसका आकार हर साल अलग-अलग हो सकता है।

अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के दो प्रमुख रास्ते

अमरनाथ यात्रा के लिए मुख्य रूप से दो मार्ग इस्तेमाल किए जाते हैं।

पहलगाम-नुनवान मार्ग: यह पारंपरिक मार्ग करीब 48 किलोमीटर लंबा है। दूरी अधिक होने के बावजूद इसे अपेक्षाकृत आसान रास्ता माना जाता है।

बालटाल मार्ग: यह रास्ता करीब 14 किलोमीटर लंबा है। दूरी कम है, लेकिन इसमें कई हिस्सों में कठिन और खड़ी चढ़ाई है। यह मार्ग गांदरबल जिले के बालटाल से अमरनाथ गुफा तक पहुंचता है।

अब छड़ी मुबारक के साथ होगा धार्मिक समापन

श्रद्धालुओं के लिए यात्रा 9 अगस्त से बंद होने के बावजूद अमरनाथ यात्रा की धार्मिक परंपराएं जारी रहेंगी। 28 अगस्त को छड़ी मुबारक के साथ यात्रा का पारंपरिक समापन होगा।

इस तरह खराब मौसम और भूस्खलन के कारण इस साल अमरनाथ यात्रा का सामान्य कार्यक्रम समय से पहले खत्म हो रहा है, लेकिन धार्मिक रूप से यात्रा का समापन निर्धारित परंपरा के अनुसार ही किया जाएगा।

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