Jantar Mantar Police Action Investigation: जंतर-मंतर पर संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर लगे आरोपों की जांच अब सुप्रीम कोर्ट की बनाई हाई पावर्ड कमेटी करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 5 सदस्यीय कमेटी के सदस्यों के नामों का ऐलान किया। कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।
कमेटी में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, CBI के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एलआर बिश्नोई को शामिल किया गया है।
#BREAKING: The Supreme Court has constituted a five-member high-powered committee to investigate violence and police action during protests at Jantar Mantar and elsewhere. It is headed by former Supreme Court judge Justice R. Subhash Reddy, with four other former judges and… pic.twitter.com/oa4ECb6uuS
— IANS (@ians_india) August 20, 2026
प्रदर्शनकारियों ने लगाए थे पुलिस पर आरोप
18 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने का फैसला लिया था। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर कार्रवाई के दौरान पैलेटगन चलाने और महिलाओं के साथ बदसलूकी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करीब 36 दिनों तक चला था। 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया था।
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दिल्ली पुलिस ने कहा था- संसद मार्च की अनुमति नहीं थी
सुप्रीम कोर्ट में 18 अगस्त की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा था कि 20 जुलाई को किया गया संसद मार्च गैरकानूनी था और इसके लिए अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन में कुछ हिस्ट्रीशीटर भी शामिल हो गए थे।
पुलिस ने दावा किया था कि संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने यह भी कहा था कि प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं किया गया।
DCP ने दाखिल किया था हलफनामा
दिल्ली पुलिस की ओर से डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था। इसमें पुलिस ने संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं और बल प्रयोग को लेकर अपना पक्ष रखा था।
यह हलफनामा पुलिस की कथित ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई 5 सदस्यीय कमेटी पूरे मामले की जांच करेगी और यह देखा जाएगा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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