Voter List Revision in 17 States: मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना और दर्ज जानकारी में गलतियों को सुधारना है। आयोग ने 1 जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख निर्धारित की है। इसके अलावा, 2027 में 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं से भी पहले से आवेदन लेने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस चरण में 1 जनवरी 2027 की पात्रता के आधार पर मिलने वाले आवेदनों पर ही फैसला किया जाएगा।
The Election Commission of India (ECI) has directed 17 States and Union Territories to conduct a Special Summary Revision (SSR) of electoral rolls under Section 21 of the Representation of the People Act, 1950, with January 1, 2027, as the qualifying date.
The revision will cover Andaman and Nicobar Islands, Assam, Bihar, Chhattisgarh, Goa, Gujarat, Kerala, Lakshadweep, Madhya Pradesh, Manipur, Puducherry, Punjab, Rajasthan, Tamil Nadu, Uttar Pradesh, Uttarakhand, and West Bengal.
The Commission stated that the schedule for SSR in States and UTs where the Special Intensive Revision (SIR) is ongoing or has recently been completed will be announced later.
— ANI (@ANI) October 15, 2026
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और सत्यापन की प्रक्रिया पर चिंता जताई है। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना जरूरी है।
इन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगी वोटर लिस्ट अपडेट
चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार, SSR की प्रक्रिया इन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कराई जाएगी:
| 1. | अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह |
| 2. | असम |
| 3. | बिहार |
| 4. | छत्तीसगढ़ |
| 5. | गोवा |
| 6. | गुजरात |
| 7. | केरल |
| 8. | लक्षद्वीप |
| 9. | मध्य प्रदेश |
| 10. | मणिपुर |
| 11. | पुडुचेरी |
| 12. | पंजाब |
| 13. | राजस्थान |
| 14. | तमिलनाडु |
| 15. | उत्तर प्रदेश |
| 16. | उत्तराखंड |
| 17. | पश्चिम बंगाल |
इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा ऐसे राज्य हैं, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
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कब जारी होगी ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट?
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए कार्यक्रम भी निर्धारित किया है। इसके तहत मतदान केंद्रों की समीक्षा से लेकर दावे-आपत्तियों के निपटारे तक की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
| 2 नवंबर
2026
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मतदान केंद्रों की समीक्षा
मतदान केंद्रों के युक्तिकरण की प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा।
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| 12 नवंबर
2026
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ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
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| 11 दिसंबर
2026
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दावे और आपत्तियां
नाम जुड़वाने, सुधार कराने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तारीख।
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| 28 दिसंबर
2026
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दावों-आपत्तियों का निपटारा
प्राप्त दावों और आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा।
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| 4 जनवरी
2027
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फाइनल वोटर लिस्ट
अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
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| स्रोत: चुनाव आयोग के कार्यक्रम पर आधारित रिपोर्ट।
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SSR क्या है?
SSR का पूरा नाम स्पेशल समरी रिवीजन (Special Summary Revision) है। हिंदी में इसे मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कहा जाता है।
इस प्रक्रिया के तहत मौजूदा मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। इसमें पात्र नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, पहले से दर्ज जानकारी में गलतियां सुधारना और मतदाता सूची से संबंधित दावों एवं आपत्तियों की जांच करना शामिल है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से छूट न जाए। साथ ही, मतदाता सूची में दर्ज जानकारी सही और अपडेट रहे।
SIR क्या है?
SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) है। इसे हिंदी में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कहा जाता है।
इस प्रक्रिया में मतदाता सूची का अधिक व्यापक सत्यापन किया जाता है। इसके तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मतदाताओं की जानकारी की जांच, पात्रता का सत्यापन और मृत, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टियों की पहचान जैसे काम किए जाते हैं।
SIR के दौरान गणना फॉर्म भरवाने और जरूरत के मुताबिक दस्तावेजों की जांच करने जैसे चरण भी शामिल हो सकते हैं। यह प्रक्रिया SSR की तुलना में अधिक गहन होती है।
SSR और SIR में क्या अंतर है?
| आधार | SSR | SIR |
| पूरा नाम | स्पेशल समरी रिवीजन | स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन |
| मुख्य उद्देश्य | मौजूदा मतदाता सूची को अपडेट करना | मतदाता सूची का गहन सत्यापन करना |
| प्रक्रिया | नाम जोड़ना, विवरण सुधारना और दावे-आपत्तियों की जांच | निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाताओं की जानकारी का व्यापक सत्यापन |
| दस्तावेज | आवेदन के प्रकार और मामले के अनुसार जरूरी दस्तावेज | निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार गणना फॉर्म और जरूरत पड़ने पर दस्तावेजों की जांच |
| प्रमुख फोकस | पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और गलतियां सुधारना | मतदाता सूची की व्यापक जांच और प्रविष्टियों का सत्यापन |
दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और विश्वसनीय बनाए रखना है। मुख्य अंतर यह है कि SSR में मौजूदा सूची को अपडेट करने पर जोर रहता है, जबकि SIR में मतदाता सूची का गहन सत्यापन किया जाता है।
SSR के दौरान कौन-सा फॉर्म भरना होगा?
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या जानकारी में बदलाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने अलग-अलग फॉर्म निर्धारित किए हैं।
- फॉर्म-6: मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए।
- फॉर्म-7: किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या निर्धारित आधार पर नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए।
- फॉर्म-8: मतदाता सूची में दर्ज विवरण में सुधार, पता बदलने या अन्य निर्धारित संशोधनों के लिए।
फॉर्म जमा करने के बाद संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) आवेदन और पात्रता की जांच करता है। केवल आवेदन करने से नाम अपने आप मतदाता सूची में शामिल नहीं हो जाता।
SIR में नाम छूट गया है तो क्या करें?
अगर SIR के दौरान जारी मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम शामिल नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज देने पड़ सकते हैं। इसके बाद संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी पात्रता की जांच करके नाम शामिल करने पर फैसला करेगा।
मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर निर्देश और समय-सीमा जरूर जांच लें।
मतदान केंद्रों को लेकर भी जारी किए निर्देश
चुनाव आयोग ने SSR के दौरान मतदान केंद्रों की संख्या और उनके स्थान की समीक्षा करने को कहा है। आयोग के निर्देशों के अनुसार, सामान्य तौर पर एक मतदान केंद्र पर 1,200 से अधिक मतदाता नहीं होने चाहिए। इससे अधिक मतदाता होने की स्थिति में आयोग की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी।
मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से अधिक दूरी तय न करनी पड़े और उन्हें प्राकृतिक बाधाओं को पार न करना पड़े, इसके लिए भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। हाईराइज इमारतों, रिहायशी कॉलोनियों और शहरी झुग्गी-बस्तियों में सर्वे किया जाएगा। मौजूदा और प्रस्तावित मतदान केंद्रों का भौतिक सत्यापन भी होगा।
अधिकारियों के तबादले पर भी निर्देश
आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि SSR के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO), सहायक ERO और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
आयोग ने संबंधित पदों को खाली नहीं रखने और पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का तबादला आयोग की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं करने को कहा है। मतदाता सूची में लोगों के पते एक समान प्रारूप में दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि घर और मतदान क्षेत्र की पहचान करने में आसानी हो।
बाकी राज्यों में SSR का कार्यक्रम कब आएगा?
चुनाव आयोग ने बताया है कि आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना में SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
मतदाताओं के लिए जरूरी बात: अपनी मतदाता सूची में नाम और अन्य जानकारी की जांच करें। अगर नाम नहीं है या विवरण में गलती है, तो निर्धारित फॉर्म के माध्यम से आवेदन करें। अंतिम निर्णय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी की जांच के बाद लिया जाएगा।
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