Supreme Court March Case Rahul Gandhi: 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक विपक्षी नेताओं के मार्च से जुड़े मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी कोर्ट को डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता। ऐसी कोशिशें बेकार हैं और इन पर कोई ध्यान नहीं देता।
CJI ने कहा कि अदालत को पता है कि कोर्ट के बाहर और अंदर क्या कहा जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रहे हैं। हमें हर बात की जानकारी है।”
सुनवाई के दौरान CJI ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर सवाल उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति को अपने आचरण पर सफाई देनी होगी।
राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत 14 नेताओं को नोटिस
12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी नेताओं और उनके समर्थकों के जुटने से जुड़े मामले में राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत 14 नेताओं को नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली विपक्षी नेताओं की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा।
सुप्रीम कोर्ट मार्च पर नियम बनाने की मांग
12 अक्टूबर के मार्च के बाद सुप्रीम कोर्ट परिसर और उसके आसपास राजनीतिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाने की मांग वाली याचिका दाखिल की गई थी। इसमें प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की जांच और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग भी की गई।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में इस तरह की घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी समेत कुछ राजनीतिक नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग भी उठाई।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत ने 12 अक्टूबर की घटनाओं से संबंधित CCTV और अन्य डिजिटल फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। मामले में एक महिला पत्रकार के साथ कथित धक्का-मुक्की का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत में इस घटना से जुड़े आरोपों पर चर्चा हुई।
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि याचिका पर नोटिस जारी करने का मतलब संबंधित नेताओं के आचरण को सही ठहराना नहीं है। अदालत ने कहा कि मामले में उठाए गए सवालों पर आगे विचार किया जाएगा।
SIR को लेकर विपक्ष की याचिका पर भी जवाब तलब
विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती दी है। याचिका में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए रिकॉर्ड और पारदर्शिता से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। अदालत में अब SIR से जुड़े सवालों के साथ-साथ 12 अक्टूबर को हुए मार्च के दौरान नेताओं के आचरण से संबंधित मुद्दे भी विचाराधीन हैं।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। अदालत इन जवाबों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी। फिलहाल, नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित नेताओं के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं।
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