नीले ड्रम वाली मुस्कान को फांसी, प्रेमी साहिल को भी सजा-ए-मौत; जेल में जन्मी मासूम बच्ची का क्या होगा?

Meerut Blue Drum Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ में पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद अब मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासकर 10 महीने की उस मासूम बच्ची की परवरिश को लेकर चर्चा हो रही है, जो अपनी मां के जेल में रहने के दौरान पैदा हुई थी। सजा सुनाए जाने के वक्त भी बच्ची अपनी मां मुस्कान की गोद में थी।

मुस्कान ने अदालत में अपनी सजा के बारे में पूछे जाने पर कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से जब यही सवाल पूछा गया, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। अदालत के फैसले के बाद सौरभ के परिवार ने न्याय मिलने की बात कही, लेकिन दोनों बच्चियों की देखभाल और भविष्य को लेकर सवाल बने हुए हैं।

पति की हत्या कर नीले ड्रम में छिपाया था शव

यह मामला 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। मुस्कान और साहिल पर सौरभ की हत्या करने और सबूत मिटाने का आरोप था। वारदात के बाद सौरभ के शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया। इसके बाद ड्रम में सीमेंट का घोल डाल दिया गया था।

मामले की सुनवाई के बाद मेरठ की अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई। सजा सुनाते हुए जज ने कहा, “अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है। मुस्कान-साहिल, आप दोनों ने ही सौरभ की नृशंस हत्या की है। इसलिए माफी स्वीकार नहीं होगी।”

सजा सुनते ही रोने लगे मुस्कान और साहिल

सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। दोनों सजा का ऐलान होने के दौरान फूट-फूटकर रोने लगे।

जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी होने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह चुप हो गई। साहिल से भी यही सवाल किया गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

फैसला सुनाए जाने के बाद सौरभ की मां रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया।

सौरभ की मां बोलीं- हमने पहली लड़ाई जीती

फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद सौरभ राजपूत की मां रेणु देवी ने राहत जताई। उन्होंने कहा, “हमारे लिए यह बहुत बड़ी राहत है कि दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई है। हम बहुत खुश हैं और हमारा पूरा परिवार खुश है। हमने पहली लड़ाई जीत ली है। अगर वे इस मामले को आगे लेकर जाते हैं, तो हम दूसरी और तीसरी लड़ाई भी जीतेंगे। सच को न्याय मिलना चाहिए।”

सजा सुनाए जाने के वक्त मुस्कान की गोद में थी 10 महीने की बेटी

मुस्कान को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़े जाने के दौरान उसकी छोटी बेटी मन्नत उर्फ राधा भी गोद में थी। बच्ची का जन्म नवंबर 2025 में हुआ था, जब मुस्कान जेल में बंद थी।

मुस्कान की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी करीब सात साल की है, जबकि छोटी बेटी अभी 10 महीने की है। मां को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों बच्चियों की परवरिश और भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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जेल में जन्मी बच्ची का क्या होगा? 

जेल में बंद महिला कैदी के छह साल तक के बच्चे को नियमानुसार मां के साथ रहने की अनुमति दी जा सकती है। इस दौरान बच्चे के खानपान, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरी सुविधाओं का ध्यान रखने की व्यवस्था होती है।

ऐसे में छोटी बेटी राधा फिलहाल अपनी मां के साथ जेल में रह सकती है। हालांकि, आगे उसकी देखभाल कौन करेगा और उसे किसके संरक्षण में रखा जाएगा, यह परिवार की स्थिति और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

मुस्कान ने अदालत में भी अपनी बच्चियों की देखभाल की गुहार लगाई। उसके इस बयान के बाद मामले में सजा के साथ-साथ दोनों मासूमों के भविष्य का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है।

बड़ी बेटी को लेकर क्या है स्थिति?

मुस्कान की बड़ी बेटी की परवरिश को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बड़ी बेटी अपने ननिहाल में रह रही है। सौरभ के परिवार की ओर से बच्चियों की देखभाल को लेकर क्या अंतिम निर्णय लिया गया है, इसकी स्पष्ट पुष्टि जरूरी है।

मां और पिता से जुड़ी इस घटना के बाद दोनों बच्चियों की जिम्मेदारी किसके पास होगी, यह परिवार के निर्णय और जरूरत पड़ने पर संबंधित कानूनी प्रक्रिया से तय हो सकता है। फिलहाल, छोटी बच्ची की देखभाल को लेकर स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि वह अभी पूरी तरह अपनी देखभाल के लिए दूसरों पर निर्भर है।

कौन हैं मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाने वाले जज?

मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाने वाले मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा-II का जन्म 2 जुलाई 1971 को मऊ में हुआ था। उन्होंने बीए, एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की है।

उन्होंने 31 मई 2003 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में न्यायिक सेवा शुरू की थी। करीब 23 साल के न्यायिक अनुभव के दौरान वह गाजीपुर, अलीगढ़, गोरखपुर, कानपुर और मिर्जापुर समेत कई जिलों में तैनात रहे। नवंबर 2024 में वह मिर्जापुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। 21 मई 2026 से वह मेरठ में तैनात हैं।

एसएसपी बोले- केस में अच्छा काम करने वालों को मिलेगा इनाम

मेरठ के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या की थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में अच्छा काम करने वाले सभी लोग प्रशंसा के पात्र हैं। ऐसे लोगों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार दिया जाएगा।

सरकारी वकील ने बताया- कैसे आगे बढ़ेगी फांसी की सजा की प्रक्रिया

जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) केके चौबे के मुताबिक, अदालत के फैसले को करीब एक सप्ताह बाद फांसी की सजा की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेजा जाएगा। हाईकोर्ट से सजा की पुष्टि होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट जाएगा। वहां भी सजा की पुष्टि होने पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इसके बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका का विकल्प भी हो सकता है। सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही फांसी की तारीख तय की जा सकती है।

इस प्रक्रिया में दो से तीन साल या उससे अधिक समय लग सकता है। हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से सजा में बदलाव होने या राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका स्वीकार किए जाने की स्थिति में फांसी की सजा लागू नहीं भी हो सकती है।

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मेरठ जेल में आखिरी बार 1975 में दी गई थी फांसी

वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में आखिरी बार वर्ष 1975 में मुजफ्फरनगर के करम सिंह को फांसी दी गई थी। उसके बाद मेरठ जेल में किसी को फांसी नहीं दी गई।

अब मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई गई है। यदि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों को फांसी दी जाती है, तो साहिल मेरठ जेल में फांसी पाने वाला दूसरा पुरुष और मुस्कान पहली महिला होगी।

वर्ष 2014 में निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी देने की तैयारी की गई थी, लेकिन आखिरी समय में यह प्रक्रिया टल गई थी।

मेरठ में महिला को पहली बार फांसी की सजा

मुस्कान को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मेरठ में महिला को मौत की सजा देने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2003 में एक अन्य मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी।

हालांकि, अदालत से मौत की सजा सुनाए जाने और उसे अंतिम रूप से लागू किए जाने के बीच कई कानूनी चरण होते हैं। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मुस्कान और साहिल को कब फांसी दी जाएगी।

फांसी की सजा के बाद विशेष बैरक में शिफ्ट होंगे मुस्कान और साहिल

फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मेरठ जिला कारागार में मुस्कान और साहिल की व्यवस्था बदलने की तैयारी की गई है। फैसले के बाद जेल प्रशासन की बैठक हुई, जिसमें दोनों को विशेष बैरक में रखने सहित अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। उन्हें 24 घंटे के भीतर विशेष बैरक में शिफ्ट किए जाने की बात कही गई है।

मुस्कान रस्तोगी को अभी तक बैरक नंबर 12-बी में और साहिल शुक्ला को बैरक नंबर 15 में रखा गया था। दोनों अब तक सामान्य कपड़े पहन रहे थे। जेल प्रशासन के मुताबिक, नई व्यवस्था के तहत मुस्कान को क्रीम रंग की साड़ी या सूट और साहिल को सफेद कुर्ता-पायजामा पहनना होगा।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, अदालत के फैसले की प्रति मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके साथ ही दोनों को कैदी नंबर भी आवंटित किया जाएगा।

वकील बोले- महिला को फांसी की सजा सुनाना एक मिसाल

अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि मुस्कान और साहिल को हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। उनके मुताबिक, अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 50 हजार रुपये और धारा 238A के तहत 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

उन्होंने कहा कि पूरे देश की नजर इस मामले पर थी कि अदालत दोनों को क्या सजा सुनाती है। सजा का ऐलान होने के बाद दोनों सदमे में नजर आए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को मौत की सजा मिलने पर उसकी मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिवक्ता के मुताबिक, इस मामले में महिला को फांसी की सजा सुनाया जाना भी इसे महत्वपूर्ण बनाता है।

‘बच्चों के आधार पर नहीं मिलेगी रियायत’

अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाए जाने पर कहा, “दोनों को मौत की सजा सुनाई गई है। अब इस पर इससे ज्यादा कुछ कहने के लिए नहीं है। मैंने पहले ही कहा था कि बेटी या बेटा होने के आधार पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी।

उन्होंने अपराध किया है और उन्हें उसी के अनुसार सजा मिलेगी। उन्हें उनके अपराध की सजा मिली है और कोई छूट नहीं दी गई है। ऐसे मामले में अगर कोई आरोपी के प्रति सहानुभूति दिखाता है या उसे रियायत देने की बात करता है, तो यह कानून का मजाक बनाने जैसा होगा।”

अब सबसे बड़ा सवाल- मासूम बच्चियों की परवरिश कौन करेगा?

सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाकर अपना फैसला दे दिया है। लेकिन इस पूरे मामले में दो मासूम बच्चियों का भविष्य भी एक अहम सवाल है। बड़ी बेटी की देखभाल और छोटी बेटी राधा की परवरिश की जिम्मेदारी किसके पास होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

मुस्कान ने अदालत में सिर्फ इतना कहा कि उसकी बच्चियों का ख्याल रखा जाए। अब देखना होगा कि परिवार और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के जरिए दोनों बच्चियों के लिए कैसी व्यवस्था बनती है।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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