Iran Rejects Pakistan Role: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि इस पूरे विवाद में पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं है।
भारत में मौजूद ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही (Abdul Majeed Hakim Ilahi) ने रविवार को पटना में पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के जरिए अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी तरह की बातचीत की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि यह अफवाहें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम पैदा हो और तेल बाजार प्रभावित हो।
इलाही ने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी भी तरह की गंभीर कूटनीतिक बातचीत नहीं चल रही है। उनके मुताबिक, कुछ देश केवल दिखावे के लिए बातचीत की बातें कर रहे हैं, जबकि जमीन पर कोई ठोस पहल नहीं है।
ट्रंप की धमकी पर ईरान का करारा जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ओर से दी गई धमकियों पर ईरान ने सख्त रुख अपनाया है। इलाही ने कहा,
“अमेरिका पिछले 47 सालों में भी ईरान का कुछ नहीं कर पाया है और आगे भी कुछ नहीं कर पाएगा।”
उन्होंने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि अमेरिका युद्ध का जीत चुका है। ईरान ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि असली फैसला “जंग के मैदान” में होगा, न कि बयानों से।
इलाही ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका ने तीन दिनों में कार्रवाई पूरी करने की बात कही थी, लेकिन हकीकत यह है कि जंग लंबे समय से जारी है और स्थिति अब भी नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।
होर्मुज स्ट्रेट पर टकराव, वैश्विक चिंता बढ़ी
बता दें कि इस पूरे विवाद के केंद्र में होर्मुज स्ट्रेट बना हुआ है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है।
दरअसल ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया तो ईरान को “नरक जैसे हालात” का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमले की भी बात कही, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
क्या हो सकते हैं इसके असर?
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अगर तनाव और बढ़ता है, तो इसके असर वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई दे सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अहम समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की बाधा सीधे तेल सप्लाई को प्रभावित करेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में सैन्य गतिविधियां और टकराव बढ़ने की आशंका है, जो क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर सकता है। इसका असर केवल तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों में भी अस्थिरता देखने को मिल सकती है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाजी और रणनीतिक दबाव जारी है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। किसी भी छोटी घटना से यह टकराव बड़े युद्ध में बदल सकता है।






