Nepal PM Balen Shah: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के ‘भारत की जमीन पर कब्जे’ संबंधी बयान पर उठे विवाद के बाद नेपाल सरकार ने आधिकारिक सफाई दी है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी का संबंध भारत-नेपाल सीमा पर मौजूद ‘नो-मैन्स लैंड’ और सीमा पार अतिक्रमण से था, न कि किसी नए क्षेत्रीय दावे से।
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि भारत और नेपाल के बीच वर्तमान सीमा 1816 की सुगौली संधि पर आधारित है। मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनका सीमांकन अब भी लंबित है और उन्हें आपसी वार्ता के जरिए सुलझाने की प्रक्रिया जारी है।
कालापानी, लिपुलेख समेत चार क्षेत्रों को लेकर विवाद
भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सीमा विवाद बना हुआ है, जिसमें कालापानी, लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और सुस्ता प्रमुख विवादित क्षेत्र हैं। नेपाल का दावा है कि इन इलाकों का सीमांकन अब तक पूरी तरह नहीं हो पाया है और इन्हें लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। वहीं भारत का लगातार यह रुख रहा है कि कालापानी, लिपुलेख और आसपास के क्षेत्र उत्तराखंड का अभिन्न हिस्सा हैं। भारत का कहना है कि सीमा से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान आपसी बातचीत और द्विपक्षीय कूटनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।
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सीमा पार कब्जे और नो-मैन्स लैंड का मुद्दा
नेपाल विदेश मंत्रालय ने कहा कि मुख्य सीमा विवादों के अलावा कुछ इलाकों में सीमा पार कब्जे और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण की समस्याएं भी मौजूद हैं। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ स्थानों पर भारतीय नागरिक नेपाली क्षेत्र की जमीन का उपयोग करते हैं, जबकि कुछ जगहों पर नेपाली नागरिक भारतीय क्षेत्र की जमीन का इस्तेमाल करते हैं। प्रधानमंत्री बालेन शाह की संसद में की गई टिप्पणी इसी संदर्भ में थी।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि दोनों देशों की तकनीकी टीमें लंबे समय से सीमा स्तंभों के निर्माण, मरम्मत और तथ्यों के सत्यापन पर काम कर रही हैं। नेपाल सरकार ऐतिहासिक दस्तावेजों, नक्शों और पुराने समझौतों के आधार पर सीमा विवादों का समाधान चाहती है।
कैलाश मानसरोवर मार्ग को लेकर भी हुआ था विवाद
इस महीने की शुरुआत में नेपाल ने लिपुलेख दर्रे के रास्ते होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति जताई थी। इसके जवाब में भारत ने नेपाल के क्षेत्रीय दावों को खारिज करते हुए उन्हें “एकतरफा और कृत्रिम विस्तार” करार दिया था।
विशेषज्ञों की मदद से निकाला जाएगा समाधान
बालेन शाह ने संसद में सीमा विवाद से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि भारत और नेपाल इस पुराने विवाद को सुलझाने पर सहमत हैं। इसके लिए इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और अन्य विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि नेपाल ने इस मुद्दे को चीन और यूनाइटेड किंगडम के समक्ष भी उठाया है।
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