Iran warns the US: मध्य पूर्व में तनाव कम करने की कोशिशों के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने साफ कहा है कि यदि हालिया शांति समझौता टूटता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और ट्रंप प्रशासन की होगी।
अल जजीरा के मुताबिक, यह बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार शुक्रवार को फोन पर बातचीत के दौरान दिया है। उन्होंने कहा कि लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में युद्ध खत्म कराना अमेरिका की जिम्मेदारी है। अगर किसी भी पक्ष की ओर से समझौते का उल्लंघन होता है, तो वॉशिंगटन जवाबदेह होगा।.
हिजबुल्लाह का दो टूक संदेश
इस बीच, हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने युद्धविराम की खबरों के कुछ घंटे बाद ही कड़ा रुख अपनाया।
बेरूत में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह कभी भी इजराइली कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा। संगठन कब्जे वाले क्षेत्रों को मुक्त कराने के अपने लक्ष्य पर कायम रहेगा।
नईम कासिम ने कहा कि हिजबुल्लाह लेबनान के संविधान के दायरे में काम करता है और किसी भी विदेशी दबदबे को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा,
“अगर दुश्मन हमारे खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल करेगा, तो हम भी हथियारों से जवाब देंगे।”
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स्विट्जरलैंड में फिर शुरू हो सकती है अमेरिका-ईरान वार्ता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड रवाना हो चुके हैं। उनका मकसद अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता को फिर से शुरू करना है।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी संभावित बातचीत में शामिल होने के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच सकते हैं।
हालांकि, बातचीत कब शुरू होगी, यह अभी साफ नहीं है। वार्ता का अगला दौर शुक्रवार (19 जून) से शुरू होना था, लेकिन लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ी हिंसा के कारण इसे अचानक टाल दिया गया।
विटकॉफ और कुशनर ने ही ईरान के साथ शुरुआती समझौता ज्ञापन (MoU) तक पहुंचने वाली बातचीत का नेतृत्व किया था।
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