Indus Water Treaty: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत को खुली धमकी दी है। पाकिस्तानी चैनल एआरवाई न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है और पानी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, तो वह भारत के खिलाफ युद्ध शुरू करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पानी पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है। यदि भारत तेजी से ऐसे कदम उठाता है, जिससे पाकिस्तान के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो सैन्य कार्रवाई समेत सभी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
We will go to war with India 🇮🇳 if they do not change their behavior regarding water.
Because water is life, and they are taking it away from us.
• Pak Defence Minister: Khawaja Asif pic.twitter.com/GAuwUqtdVO
— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) June 20, 2026
यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर रखा है और दोनों देशों के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने उठाया बड़ा कदम
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। भारत ने साफ कहा था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस, भरोसेमंद और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक इस समझौते को दोबारा लागू नहीं किया जाएगा।
भारत का कहना है कि वर्षों तक समझौते का पालन करने के बावजूद पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद जारी रहा। ऐसे में आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध एक साथ नहीं चल सकते। इसी वजह से भारत ने अपने रुख को सख्त रखते हुए साफ कर दिया है कि आतंकवाद पर कार्रवाई के बिना सिंधु जल संधि की बहाली संभव नहीं है।
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भारत-पाकिस्तान के बीच क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर हुआ एक ऐतिहासिक समझौता है। 19 सितंबर 1960 को कराची में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर विवाद आज का नहीं है। 1947 में विभाजन के बाद दोनों देशों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर तनाव शुरू हो गया था। इसके बाद कई दौर की बातचीत चली और आखिरकार 1960 में दोनों देश इस समझौते पर सहमत हुए।
सिंधु नदी प्रणाली में कौन-कौन सी नदियां आती हैं?
सिंधु नदी प्रणाली छह प्रमुख नदियों से मिलकर बनी है, जिनमें सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज शामिल हैं। इन नदियों का कुल जलग्रहण क्षेत्र करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस पूरे क्षेत्र का लगभग 47 फीसदी हिस्सा पाकिस्तान, 39 फीसदी भारत, 8 फीसदी चीन और 6 फीसदी अफगानिस्तान में आता है। अनुमान है कि करीब 30 करोड़ लोगों का जीवन, खेती-किसानी और आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी नदी प्रणाली पर निर्भर करती है।
सिंधु जल संधि स्थगित होने से पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था बड़े पैमाने पर सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। देश की लगभग 90 फीसदी कृषि भूमि, यानी करीब 4.7 करोड़ एकड़ क्षेत्र की सिंचाई इसी जल प्रणाली से होती है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय आय में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 23 फीसदी है, जबकि करीब 68 फीसदी ग्रामीण आबादी की आजीविका खेती पर निर्भर करती है।
ऐसे में यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो खाद्यान्न उत्पादन, रोजगार, उद्योग और देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान के प्रमुख जलाशय और जलविद्युत परियोजनाएं, जैसे मंगल डैम और तारबेला डैम भी प्रभावित हो सकते हैं। इन बांधों में पानी की कमी आने पर देश में बिजली उत्पादन 30 से 50 फीसदी तक घटने की आशंका जताई जा रही है, जिससे ऊर्जा संकट और आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
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