Maharashtra TET Paper Leak: महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से ठीक एक दिन पहले बड़े पेपर लीक का मामला सामने आया है। रविवार को होने वाली परीक्षा से करीब 24 घंटे पहले प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि के बाद 4.28 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। महाराष्ट्र स्टेट एग्जामिनेशन काउंसिल (MSEC) ने तत्काल प्रभाव से परीक्षा रद्द कर दी और नई तारीखों की घोषणा जांच पूरी होने के बाद करने की बात कही है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है, जबकि पुलिस पेपर लीक के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच में जुटी है।
पुलिस को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली थी। इसके बाद ठाणे जिले के भिवंडी इलाके में कई स्थानों पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान संदिग्ध प्रश्नपत्र बरामद किए गए, जिन्हें महाराष्ट्र स्टेट एग्जामिनेशन काउंसिल के अधिकारियों से सत्यापित कराया गया। जांच में बरामद प्रश्नपत्र वास्तविक परीक्षा से मेल खाने की पुष्टि हुई। इसके बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया।
पुलिस ने इस मामले में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पेपर किस स्तर से लीक हुआ और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया।
4.28 लाख अभ्यर्थियों पर पड़ा असर
रविवार को होने वाली TET परीक्षा में राज्यभर से 4.28 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल होने वाले थे। महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए TET पास करना अनिवार्य है। इसके अलावा, पहले से कार्यरत कई सरकारी शिक्षकों के लिए भी सेवा संबंधी नियमों और पदोन्नति के लिए TET की पात्रता आवश्यक मानी जाती है। परीक्षा रद्द होने से लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी और भविष्य की योजनाओं पर असर पड़ा है।

कड़े सुरक्षा इंतजाम भी नहीं रोक सके पेपर लीक
इस बार परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे।
- राज्यभर में 1,729 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
- 18,000 AI आधारित CCTV कैमरे लगाए गए थे।
- सभी परीक्षा केंद्रों की निगरानी राज्य और जिला स्तर के कंट्रोल रूम से की जानी थी।
- अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन के जरिए पहचान सुनिश्चित की जानी थी।
- प्रवेश से पहले मेटल डिटेक्टर से जांच की व्यवस्था थी।
- मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित थे।
- आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे पहचान पत्र के बिना प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
- इतने व्यापक सुरक्षा इंतजामों के बावजूद प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही लीक हो गया, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ये भी पढ़ेंः
पुणे मर्डर केस: हत्या के आरोपी सिया-चेतन का नया VIDEO सामने आया, क्रिकेट मैच देखते दिखे दोनों; केतन के लिए निकला कैंडल मार्च
पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी परीक्षाएं भी हुईं प्रभावित
देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर लीक के कारण विवादों में रही हैं। इनमें राजस्थान REET, उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा और हाल ही में आयोजित NEET-UG जैसी परीक्षाएं भी शामिल हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या है TET परीक्षा?
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) एक पात्रता परीक्षा है, जिसके माध्यम से यह तय किया जाता है कि कोई अभ्यर्थी कक्षा 1 से 8 तक के सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक बनने के योग्य है या नहीं। इस परीक्षा को नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने वर्ष 2010 में अनिवार्य किया था। केंद्र सरकार CTET आयोजित करती है, जबकि प्रत्येक राज्य अपनी State TET परीक्षा कराता है।
सुप्रीम कोर्ट ने TET को बताया अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक समय बाकी है, उनके लिए नौकरी जारी रखने और पदोन्नति पाने के लिए TET पास करना आवश्यक होगा। अदालत ने TET पास करने की अंतिम समय सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि निर्धारित अवधि तक परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों को नियमों के अनुसार सेवा छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
पेपर लीक की घटना के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक और परीक्षा पेपर लीक होने के कारण रद्द करनी पड़ी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार और वसूली का माध्यम बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ रहा है और सरकार को ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
ये भी पढ़ेंः






