US Airstrike on Iran: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह कार्रवाई ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई, जिसमें ‘एम/टी किकु (M/T Kiku)’ नाम के तेल टैंकर को निशाना बनाया गया था। अमेरिका का कहना है कि यह ऑपरेशन समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरानी सैन्य गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से किया गया।
U.S. Navy and Air Force fighter jets conducted strikes tonight on 10 Iranian military targets at multiple locations in and near the Strait of Hormuz for Iran’s drone attack on M/T Kiku. pic.twitter.com/Z0TLZRqmF6
— U.S. Central Command (@CENTCOM) June 28, 2026
रॉयटर्स के मुताबिक, इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक अन्य तेल टैंकर पर भी हमला हुआ। हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा, लेकिन वह अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा। अमेरिका ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। लगातार जहाजों पर हो रहे हमलों ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
ईरान का दावा- कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर किया हमला
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने पलटवार का दावा किया। ईरान ने कहा कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है। तेहरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका द्वारा ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक इन हमलों से हुए नुकसान को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
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IRGC की चेतावनी- हर कार्रवाई का मिलेगा करारा जवाब
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि भविष्य में दुश्मन की ओर से की जाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई का पहले से ज्यादा सख्त जवाब दिया जाएगा। IRGC ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही के नियंत्रण से जुड़े नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
IRGC ने यह भी कहा कि अब से किसी भी जहाज द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर पहले की तुलना में अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि युद्धविराम और समझौते की शर्तों का उल्लंघन जारी रहा तो दोनों देशों के बीच हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) से जुड़ी पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इजराइल ने लेबनान समझौते पर उठाए सवाल
इस बीच इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने लेबनान के साथ हुए फ्रेमवर्क समझौते की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इसे इजराइल की एक बड़ी रणनीतिक गलती बताते हुए कहा कि इस समझौते से हिजबुल्लाह को दोबारा मजबूत होने का मौका मिलेगा।
बेन-ग्वीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि इजराइल को हिजबुल्लाह को पूरी तरह खत्म करना चाहिए, न कि उसे राहत देने का अवसर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह मानना गलत होगा कि लेबनानी सेना हिजबुल्लाह को पूरी तरह निरस्त्र कर सकती है या इजराइल की सुरक्षा की गारंटी दे सकती है।
लगातार बढ़ रहा है मध्य पूर्व का संकट
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई, होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर हमले, कुवैत और बहरीन में जवाबी हमलों के दावे तथा इजराइल-लेबनान समझौते को लेकर उठे विवाद ने पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर गंभीर अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला नहीं रुका तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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