America-Saudi Airstrikes in Iraq: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित समूहों के खिलाफ संयुक्त सटीक हवाई हमले किए हैं।
CENTCOM ने पुष्टि की कि दोनों देशों ने ईरान समर्थित इराकी समूहों के ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही IRGC और उसके सहयोगी संगठनों को चेतावनी दी कि वे अमेरिकी और सहयोगी देशों पर हमले तुरंत बंद करें, अन्यथा उन्हें अमेरिकी सेना की ओर से और कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद CENTCOM ने बताया कि यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों में हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में की गई।
❗️ CENTCOM CONFIRMS US & SAUDI ARABIA LAUNCHED JOINT STRIKES on PRO-IRAN Iraqi group
WARNS IRGC & allies:
CEASE ATTACKS…
…or face further US MILITARY RESPONSE pic.twitter.com/VGI2lsiDBo
— RT (@RT_com) July 29, 2026
ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से किया जवाबी हमला
हवाई हमलों के कुछ घंटों बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयरबेस और CENTCOM सेंटर की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। हालांकि अमेरिकी सेना का कहना है कि सभी मिसाइलों को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर दिया गया और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
सऊदी ने ड्रोन गिराए, हूतियों ने टैंकर पर किया हमला
सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत के तेल प्रतिष्ठानों की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने की जिम्मेदारी ली है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने भी एक टैंकर के पास विस्फोट होने की पुष्टि की है।
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बसरा में PMF मुख्यालय पर हमला, दो जवान घायल
इराक के बसरा शहर में पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) के मुख्यालय पर भी हवाई हमला हुआ। इराक की सरकारी समाचार एजेंसी INA के अनुसार, इस हमले में PMF के दो जवान घायल हुए हैं। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
IRGC की चेतावनी, अमेरिका–सऊदी का दावा
IRGC ने कहा कि यह हमला अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया है। संगठन ने चेतावनी दी कि जब तक ईरान के खिलाफ हमले और धमकियां जारी रहेंगी, उसकी जवाबी कार्रवाई भी जारी रहेगी। वहीं, अमेरिका और सऊदी अरब का कहना है कि उनका अभियान केवल उन ठिकानों के खिलाफ है, जहां से क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की तैयारी की जा रही थी।
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