Anti Paper Leak Bill 2026: संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे के बीच बुधवार को लोकसभा ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ ध्वनि मत से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून देशभर में होने वाली प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने तथा पेपर लीक माफिया पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
यह विधेयक ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन करता है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और अन्य अनुचित साधनों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कानूनी ढांचे को और अधिक मजबूत बनाना है।
#MonsoonSession2026#LokSabha passes the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026.
The Bill amends the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024, with the objective of further strengthening the legal framework to prevent paper… pic.twitter.com/vKdvn6RWN4
— SansadTV (@sansad_tv) July 29, 2026
विधेयक पर मंगलवार को करीब नौ घंटे चर्चा हुई थी, जबकि बुधवार को विपक्ष की ओर से राहुल गांधी ने भी अपनी बात रखी। बहस और हंगामे के बाद सरकार ने ध्वनि मत से विधेयक पारित करा लिया।
क्या है नए कानून का उद्देश्य?
सरकार के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। ऐसे मामलों में संगठित गिरोहों और तकनीकी माध्यमों से होने वाली धांधली पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानून को और सख्त बनाया गया है। सरकार का दावा है कि नए संशोधन से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ेगी और छात्रों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा।
नए कानून की प्रमुख बातें
- पेपर लीक, प्रश्नपत्र चोरी और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर कड़ी सजा का प्रावधान।
- सामान्य मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है।
- ऐसे मामलों में 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- यदि अपराध संगठित गिरोह, परीक्षा माफिया, संस्थानों या किसी नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है तो कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
- जांच एजेंसियों को सभी मामलों की दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव है, जो आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करेंगी।
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छात्रों को क्या फायदा होगा?
सरकार का कहना है कि नए कानून का उद्देश्य छात्रों को दंडित करना नहीं, बल्कि परीक्षा माफिया और पेपर लीक कराने वाले संगठित नेटवर्क पर कार्रवाई करना है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बढ़ेगी और ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा होगी।
सदन में क्या हुआ?
विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बहस और हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार पर परीक्षा प्रणाली की विफलताओं को लेकर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने कहा कि यह कानून भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगा। हंगामे के बावजूद विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया।
सरकार का दावा
केंद्र सरकार का कहना है कि यह संशोधन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। नए प्रावधानों के लागू होने के बाद पेपर लीक, भर्ती घोटालों और परीक्षा में धांधली करने वाले संगठित गिरोहों पर पहले से अधिक सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।
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