Harish Dwivedi: भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में उन्हें अहम स्थान मिला है। संगठन में लंबे अनुभव और अलग-अलग राज्यों में काम करने की क्षमता के चलते पार्टी ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर करीब तीन दशक से अधिक लंबा है। उन्होंने छात्र राजनीति और संगठन के जरिए अपनी सियासी पहचान बनाई और आगे चलकर दो बार लोकसभा सांसद बने। अब राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में उनका कद पार्टी संगठन में और बढ़ गया है।
ABVP से शुरू हुआ संगठन का सफर
22 अक्टूबर 1973 को एक मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में जन्मे हरीश द्विवेदी के पिता साधुशरण दुबे किसान इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे हैं। द्विवेदी का शुरुआती जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से रहा।
1990 से 1992 के बीच उन्होंने अपने ग्राम सभा की संघ शाखा में मुख्य शिक्षक के तौर पर काम किया। इसके बाद 1991 में वह ABVP के संपर्क में आए। विद्यार्थी परिषद में उन्होंने जिला और प्रदेश स्तर पर कई जिम्मेदारियां संभालीं। 1993 से 1995 तक वह बस्ती के जिला प्रमुख रहे, जबकि 1994 से 1996 के बीच प्रदेश सहमंत्री की भूमिका निभाई। 1995 से 1998 तक उन्होंने ABVP गोरखपुर के विभाग संगठन मंत्री के तौर पर काम किया।
इसके बाद प्रयाग और आसपास के क्षेत्रों में भी संगठन की जिम्मेदारी संभाली। 1998 से 2000 तक वह प्रयाग के विभाग संगठन मंत्री रहे और 2000 से 2003 तक प्रयागराज तथा सुल्तानपुर विभाग में संगठन मंत्री की भूमिका में रहे।
बीजेपी में सक्रिय राजनीति की शुरुआत
हरीश द्विवेदी वर्ष 2004 में बीजेपी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े। इसके बाद 2005 से 2007 तक उन्होंने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी के राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम किया।
इसी दौरान उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। 2005 से 2007 तक वह भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री रहे। इसके बाद 2007 से 2010 तक प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2010 में उन्हें उत्तर प्रदेश भाजयुमो का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और 2013 तक वह इस पद पर रहे।
युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने पार्टी के कई अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। भाजयुमो की तिरंगा यात्रा समेत संगठन के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रही।
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2014 में पहली बार बने सांसद
हरीश द्विवेदी ने 2012 में बस्ती सदर विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद वह प्रदेश बीजेपी की कार्यसमिति के सदस्य के तौर पर संगठन में सक्रिय रहे।
उनके राजनीतिक करियर को असली सफलता 2014 के लोकसभा चुनाव में मिली। बीजेपी ने उन्हें बस्ती लोकसभा सीट से मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज कर पहली बार संसद का रुख किया।
2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। हरीश द्विवेदी ने बस्ती सीट से लगातार दूसरी बार जीत हासिल की और लोकसभा पहुंचे।
सांसद के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में काम किया। वह ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, प्राक्कलन और याचिका जैसी समितियों के सदस्य रहे। इसके अलावा उन्हें संसद की याचिका समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली।
चुनावी हार के बाद भी संगठन में सक्रियता जारी
2024 के लोकसभा चुनाव में हरीश द्विवेदी बस्ती सीट से चुनाव हार गए, लेकिन इसके बाद भी पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता कम नहीं हुई। बीजेपी ने उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव का इस्तेमाल राष्ट्रीय स्तर पर किया।
पूर्व बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में उन्हें राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया। इसके बाद वह बिहार के सह-प्रभारी भी रहे। बाद में पार्टी ने उन्हें असम का प्रभारी नियुक्त किया।
असम की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्होंने राज्य में पार्टी संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम किए। उनके संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए हाल ही में बीजेपी ने उन्हें राजस्थान में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों का प्रभारी भी बनाया था।
अब राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी
हरीश द्विवेदी को अब बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलना उनके लंबे संगठनात्मक सफर की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ABVP से शुरू हुआ सफर अब बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन के शीर्ष पदों में से एक तक पहुंच गया है।
राष्ट्रीय महामंत्री के तौर पर उनके सामने पार्टी संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ राज्यों में चुनावी तैयारियों और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय की जिम्मेदारी होगी। उत्तर प्रदेश से आने वाले हरीश द्विवेदी का संगठन में लंबा अनुभव पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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