S Jaishankar On Russia: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को भारत-रूस संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ मौजूदा परिस्थितियों से तय नहीं होते, बल्कि इनके पीछे कई दशकों का इतिहास है। उन्होंने कहा कि जब भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के सामने चुनौतियां थीं और दुनिया के कई देश पाकिस्तान के साथ खड़े थे, तब रूस ने भारत का साथ दिया।
नई दिल्ली में 62वें म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के संबंध खास तौर पर 1950 के दशक से मजबूत रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए मॉस्को के साथ रिश्ते केवल आज की परिस्थितियों के आधार पर तय नहीं होते, बल्कि दोनों देशों के संबंधों पर पुरानी साझेदारी की छाप है।
‘जब हमारी क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी, रूस हमारे साथ खड़ा था’
जयशंकर ने कहा कि रूस और उससे पहले सोवियत संघ ऐसा देश था, जिसने कई मौकों पर भारत का साथ दिया। उन्होंने कहा कि जब भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी, तब रूस उसके साथ खड़ा रहा।
उन्होंने कहा कि उस समय दुनिया के अधिकांश देश भारत के पड़ोस में मौजूद एक सैन्य शासन का समर्थन करना पसंद कर रहे थे। जयशंकर के मुताबिक, भारत-रूस संबंध आज उस दौर से काफी आगे बढ़ चुके हैं और अब दोनों देशों के बीच सहयोग के कई नए क्षेत्र जुड़ गए हैं।
#WATCH | Delhi: 62nd Munich Security Conference | On the future of India and Russia’s relationship, External Affairs Minister Dr. S. Jaishankar says, “India and Russia have historically very good relations, particularly since the 1950s. That history is not forgotten… For us, and Soviet Union before that was a country that stood by us in many ways when our security, when our territorial integrity was under threat. At a time when much of the world preferred backing a military regime next to us, Russia was a country with which our relations were very good and we are shaped in many ways by that legacy. Today, the relationship has widened beyond that… It is very much more today an economic relationship as well. So there is a military component, there are nuclear component, there is space issues, but there is a significant amount of trade and investment between the two countries and energy and resources as well… India’s experience has been quite positive and consistently positive. Having said that, we are seeing today an unfortunate conflict. Our position on that conflict has been very clear, which is that we would like to see an end to this conflict. This will require dialogue and diplomacy. There has to be negotiations in this regard. We have been advocating it for many years, and in recent months we have got a little bit more involved beyond advocacy. We have conversations with both Russia and Ukraine in this regard. We are trying to be helpful, starting with the Black Sea safety of shipping issue, but going beyond that to cover some immediate concerns which both of them have on grain exports, energy exports, non-attack possibilities. Those are ongoing conversations right now.”
— ANI (@ANI) October 4, 2026
अब सैन्य के साथ आर्थिक रिश्ते भी मजबूत
जयशंकर ने कहा कि आज भारत और रूस के बीच सिर्फ सैन्य सहयोग नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और संसाधनों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण संबंध हैं। इसके अलावा परमाणु और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग जारी है।
उन्होंने कहा कि रूस के साथ भारत का अनुभव अब तक काफी सकारात्मक और लगातार सकारात्मक रहा है।
कश्मीर के मुद्दे पर सोवियत संघ ने किया था वीटो
भारत और रूस के रिश्तों के इतिहास में कश्मीर का मुद्दा भी अहम रहा है। 1957 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर से संबंधित एक प्रस्ताव पेश किया गया था। तत्कालीन सोवियत संघ ने इस प्रस्ताव पर वीटो का इस्तेमाल किया था, जिसके चलते प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
उस समय ऑस्ट्रेलिया, क्यूबा, ब्रिटेन और अमेरिका ने कश्मीर में अस्थायी संयुक्त राष्ट्र बल भेजने से जुड़ा प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव को आवश्यक समर्थन मिला, लेकिन सोवियत संघ के वीटो के कारण यह आगे नहीं बढ़ सका।
1965 में पाकिस्तान के साथ थे चीन, ईरान और तुर्किये
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तान को चीन का समर्थन मिला था। चीन ने भारत पर दबाव बनाने के लिए अपनी सीमा पर सैनिकों की तैनाती की थी। ईरान और तुर्किये ने भी पाकिस्तान का समर्थन किया था। ईरान की ओर से पाकिस्तान को हथियार और ईंधन उपलब्ध कराने की बात भी सामने आई थी।
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1971 में अमेरिका और चीन पाकिस्तान के साथ थे
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिका पाकिस्तान के समर्थन में था। अमेरिका ने अपना नौसैनिक युद्धपोत बंगाल की खाड़ी की ओर भेजा था। चीन भी पाकिस्तान के साथ खड़ा था। वहीं, ईरान ने पाकिस्तान के लिए हथियार और सैन्य सामान जुटाने में मदद की थी।
इसी दौरान सोवियत संघ भारत के साथ था। भारत और सोवियत संघ के बीच अगस्त 1971 में शांति, मैत्री और सहयोग की संधि भी हुई थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी भारत का रुख साफ
जयशंकर ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत इस संघर्ष का अंत चाहता है और इसके लिए बातचीत, कूटनीति और वार्ता जरूरी है।
उन्होंने बताया कि भारत पिछले कुछ समय से रूस और यूक्रेन दोनों के साथ बातचीत कर रहा है। भारत इस मामले में मददगार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। बातचीत में ब्लैक सी में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, अनाज और ऊर्जा के निर्यात तथा हमले रोकने की संभावनाओं जैसे मुद्दे शामिल हैं।
जयशंकर ने कहा कि इन मुद्दों पर दोनों देशों के साथ भारत की बातचीत अभी जारी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 2022 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के दौरान कह चुके हैं कि “आज का दौर युद्ध का नहीं है।”
अमेरिका की भूमिका पर भी बोले जयशंकर
जयशंकर ने वैश्विक राजनीति में अमेरिका और चीन की भूमिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका की नीतियों के कारण उसकी वैश्विक भूमिका में बदलाव आया है, जबकि चीन का बढ़ता प्रभाव अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहा है।
जयशंकर का बयान ऐसे समय आया है जब भारत रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ भी अपने रिश्तों को आगे बढ़ा रहा है।
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