Sergio Gor Kashmir Statement: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान इसे भारत का अहम हिस्सा बताया। गोर के इस बयान से पाकिस्तान भड़क गया। पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और औपचारिक विरोध दर्ज कराया।
दरअसल, सर्जियो गोर बुधवार को जम्मू-कश्मीर पहुंचे और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। उनका यह दौरा इसलिए भी अहम है, क्योंकि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव के बाद यह किसी अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर का पहला दौरा है।
कश्मीर की खूबसूरती की तारीफ
जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान सर्जियो गोर ने कहा कि वह पहली बार इस क्षेत्र में आए हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की खूबसूरती की तारीफ करते हुए इसे भारत का अहम हिस्सा बताया।
अमेरिकी राजदूत का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव का प्रमुख कारण रहा है।
पाकिस्तान ने जताया कड़ा विरोध
सर्जियो गोर के बयान के बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया और अपना विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने गोर के बयान को खारिज करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत सुलझाया जाना चाहिए।
पाकिस्तान ने अमेरिका से यह भी कहा कि वह जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने सार्वजनिक बयानों में उसकी स्थिति का ध्यान रखे।
उमर अब्दुल्ला से मुलाकात में ट्रैवल एडवाइजरी पर चर्चा
सर्जियो गोर और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच मुलाकात में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति के साथ अमेरिका की ट्रैवल एडवाइजरी पर भी चर्चा हुई। गोर ने संकेत दिया कि अमेरिका मौजूदा एडवाइजरी की समीक्षा कर सकता है।
सर्जियो गोर ने कहा, “मैं आज यहां कोई बड़ा ऐलान नहीं कर सकता। नई दिल्ली, यहां के मुख्यमंत्री और सरकार ने इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए कुछ शानदार कदम उठाए हैं। इसलिए हम इस बात की समीक्षा करेंगे कि अमेरिका की ओर से फिलहाल जारी ट्रैवल एडवाइजरी को डाउनग्रेड किया जाना चाहिए या नहीं। जैसा कि मैंने पहले कहा, यह एक बेहद खूबसूरत क्षेत्र है। मुझे लगता है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी यहां आकर इसकी खूबसूरती और यहां मौजूद अवसरों को देखना पसंद करेंगे।”
VIDEO | Srinagar: On his Kashmir visit, US Ambassador to India Sergio Gor says, “I cannot make any big announcements here today…New Delhi, the CM here, the govt here, we believe, have made some incredible steps to keep this area safer and making it more safe. So, we will be… pic.twitter.com/7CCNHk2gLe
— Press Trust of India (@PTI_News) August 19, 2026
उन्होंने कहा कि फिलहाल एडवाइजरी में बदलाव को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं किया जा सकता, लेकिन क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसकी समीक्षा जरूर की जाएगी।
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उमर ने बैठक को बताया सकारात्मक
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बैठक को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा हुई कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर के मामले में किस तरह मदद कर सकता है।
उमर ने कहा कि कुछ पुराने मुद्दे हैं, जिन्हें समय के साथ सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
अनुच्छेद 370 के बाद पहला अमेरिकी राजदूत का दौरा
सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद यह किसी अमेरिकी राजदूत का पहला दौरा है।
इससे पहले 9 जनवरी 2020 को तत्कालीन अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर 15 देशों के सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ कश्मीर पहुंचे थे। उस समय यह दौरा एक बहुदेशीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर हुआ था।
क्या होती है ट्रैवल एडवाइजरी?
अमेरिका अपने नागरिकों को दूसरे देशों और उनके अलग-अलग क्षेत्रों की सुरक्षा स्थिति के आधार पर ट्रैवल एडवाइजरी जारी करता है। इसमें आतंकवाद, हिंसा, नागरिक अशांति और अन्य संभावित सुरक्षा जोखिमों की जानकारी दी जाती है।
भारत के लिए अमेरिका की सामान्य ट्रैवल एडवाइजरी लेवल-2 है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर समेत कुछ संवेदनशील इलाकों के लिए ज्यादा कड़ी चेतावनी जारी है।
जम्मू-कश्मीर में लेवल-4 की चेतावनी
अमेरिकी एडवाइजरी में जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर हिस्सों के लिए लेवल-4 यानी ‘यात्रा न करें’ की चेतावनी है। इसमें पूर्वी लद्दाख और लेह को अलग रखा गया है।
इसके अलावा भारत-पाकिस्तान सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे और मणिपुर समेत कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी कड़ी यात्रा चेतावनी जारी है।
सर्जियो गोर का बयान क्यों अहम?
जम्मू-कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान के रुख अलग-अलग रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताना कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
हालांकि, केवल इस बयान के आधार पर अमेरिका की पूरी कश्मीर नीति में बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन सर्जियो गोर का कश्मीर दौरा, उमर अब्दुल्ला से मुलाकात और ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा के संकेत जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका के रुख में संभावित बदलाव की चर्चा जरूर तेज कर सकते हैं।
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