Nepal Glacial Flood Update: नेपाल और तिब्बत में भीषण बाढ़ के बाद करीब तीन घंटे तक रोका गया राहत और बचाव अभियान फिर शुरू कर दिया गया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाके में बनी प्राकृतिक झील में पानी बढ़ने और उसके ओवरफ्लो होने के बाद अचानक बाढ़ की आशंका पैदा हो गई थी। इसी वजह से रेस्क्यू टीमों को कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए थे।
शुक्रवार को झील में पानी बढ़कर करीब 25 लाख क्यूबिक मीटर पहुंच गया। पानी ओवरफ्लो होकर ल्हेंदे खोला और फिर त्रिशूली नदी में पहुंचा। इसके बाद संभावित खतरे को देखते हुए नेपाल में बचाव अभियान रोक दिया गया। स्थिति का जायजा लेने के बाद अब टीमें दोबारा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लापता लोगों की तलाश कर रही हैं।
बुधवार को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद आई भीषण बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा के बड़े हिस्से में भारी तबाही मचाई। दोनों देशों में अब तक 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,900 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। शुक्रवार शाम 7 बजे तक मिले अपडेट के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बचाव टीमें लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हैं।
नेपाल में 547 लोगों की मौत
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 547 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 977 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है।
नेपाल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक लापता लोगों में 537 विदेशी नागरिक, 45 नेपाली सेना के जवान और 41 नेपाल पुलिसकर्मी शामिल हैं।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क और पुल बह गए हैं। मकानों के साथ-साथ हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और मलबे में फंसे लोगों को निकालने का काम जारी है।
तिब्बत में भी भारी तबाही
तिब्बत में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
चीनी बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहा है। चीन की फायर एंड रेस्क्यू फोर्स के 681 जवान और 113 वाहन राहत अभियान में लगाए गए हैं। बचाव दल मलबे के मुख्य हिस्से तक पहुंच चुका है और वहां संभावित रूप से जीवित लोगों की तलाश की जा रही है।
चीन की रेस्क्यू टीम मलबे के ‘मुख्य हिस्से’ तक पहुंची
चीन की फायर एंड रेस्क्यू फोर्स के कुल 681 जवान और 113 वाहन राहत एवं बचाव अभियान में तैनात किए गए हैं। टीम मलबे के मुख्य हिस्से तक पहुंचकर संभावित रूप से जिंदा बचे लोगों की तलाश कर रही है।
China’s rescue teams reach the ‘core’ of the mudslide in search for survivors
Total of 681 personnel and 113 vehicles from China’s fire and rescue forces have been deployed
Video: Global Times pic.twitter.com/rCvogxyjmy
— RT (@RT_com) August 28, 2026
बॉर्डर पर बनी प्राकृतिक झील से अभी भी खतरा
नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में बनी प्राकृतिक झील अभी भी चिंता का कारण बनी हुई है। काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के मुताबिक झील में जलस्तर काफी बढ़ गया है और पानी का ओवरफ्लो शुरू हो चुका है।
बताया गया है कि सीमा नदी की ऊपरी धारा की एक सहायक नदी में बर्फ और चट्टानों का मलबा गिरने से पानी का बहाव रुक गया था। इसके बाद भूस्खलन के मलबे से प्राकृतिक झील बन गई। अगर झील का बांध टूटता है तो निचले इलाकों में अचानक बड़े पैमाने पर बाढ़ आ सकती है।
त्रिशूली के सैनिक इलाके में रेस्क्यू जारी, फिर बाढ़ का अलर्ट
बाढ़ प्रभावित त्रिशूली के सैनिक इलाके में राहत और बचाव अभियान जारी है। इस बीच, नेपाल के अधिकारियों ने फिर बाढ़ की चेतावनी जारी की है। जिस जगह इस सप्ताह की शुरुआत में भीषण फ्लैश फ्लड आई थी, वहां जलस्तर बढ़ने के बाद लोगों और रेस्क्यू कर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने कहा कि जलस्तर बढ़ने से इलाके में दोबारा बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है।
VIDEO | Nuwakot (Nepal): Rescue operation underway in flood-hit Trishuli’s Sainik area.
Meanwhile, Nepal authorities issued a fresh flood warning after the water level increased at the site where a devastating flash flood occurred earlier this week, urging people and rescue… pic.twitter.com/wlwszCSOM9
— Press Trust of India (@PTI_News) August 28, 2026
चीन ने ग्लेशियर टूटने को बताया संभावित वजह
चीन ने नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ की संभावित वजह ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटना बताया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों तथा सरकारी संस्थानों ने शुरुआती जांच की है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने के कारण भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढ़ा हो सकता है।
हालांकि, आपदा की सटीक वजह और इससे हुए नुकसान का विस्तृत आकलन अभी किया जा रहा है।
चीन की तरफ करीब 400 भारतीय फंसे, सभी सुरक्षित
नेपाल में बाढ़ के बाद चीन की तरफ करीब 400 भारतीय नागरिक फंस गए हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि इन सभी से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास इन भारतीयों, उनके ट्रैवल एजेंट और ग्रुप लीडर्स के संपर्क में है। रास्ते सामान्य होने के बाद उनकी सुरक्षित भारत वापसी की व्यवस्था की जाएगी।
इससे पहले चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया जारी है।
Delhi: MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, “Our MEA control room here is working around the clock, as is the case with the control rooms in our embassy in Kathmandu, as also our embassy in Beijing. On the Chinese side, we have 400 Indian nationals, they are safe. They have… pic.twitter.com/Ml6u7rAjh7
— IANS (@ians_india) August 28, 2026
नेपाल से लौटे 21 तीर्थयात्रियों से मिले जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल में बाढ़ से सुरक्षित निकाले गए तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों की आपबीती सुनकर वह भावुक हो गए।
जयशंकर ने राहत और बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना तथा नेपाल सरकार का आभार जताया। उन्होंने भारतीय दूतावास की भूमिका की भी सराहना की, जिसने प्रभावित भारतीयों की सुरक्षित वापसी में मदद की।
ये 21 भारतीय शुक्रवार को काठमांडू से दिल्ली पहुंच गए।
Moving to hear experiences of rescued pilgrims. pic.twitter.com/bg9tSofA1H
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) August 28, 2026
320 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं
विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में बाढ़ के बाद करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है या वे लापता हैं। इसके अलावा करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी संपर्क से बाहर हैं। इनमें ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो किसी दूसरे देश के नागरिक हैं और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
इससे पहले त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे 63 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया था।
537 विदेशी नागरिक अब भी लापता
नेपाल सरकार के मुताबिक बाढ़ के बाद 537 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं। इनमें सबसे ज्यादा 178 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 33 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिक भी लापता बताए गए हैं। अधिकारियों की ओर से प्रभावित इलाकों में लगातार तलाश और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
वहीं नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक भोटेकोशी बाढ़ के बाद अब तक 121 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें 85 भारतीय, 16 चीनी, 9 दक्षिण कोरियाई, 2 अमेरिकी और 2 रूसी नागरिक शामिल हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन पर खतरा अभी बरकरार
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान दोबारा शुरू होने के बावजूद प्राकृतिक झील के कारण खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जलस्तर और नदी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।
रेस्क्यू टीमें लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं। प्रशासन की प्राथमिकता अब संभावित झील फटने की स्थिति से निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित रखना और लापता लोगों का जल्द से जल्द पता लगाना है।
Terrifying footage shows a flash flood sweeping through the Nepal–Tibet border, trapping people on rooftops and balconies. At least 469 have been killed, with hundreds still missing. pic.twitter.com/xRgRWmwut7
— Weather Monitor (@WeatherMonitors) August 28, 2026




