Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था। इस दिन देशभर में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और आधी रात को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं। मंदिरों और घरों में लड्डू गोपाल की विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और झांकियों का आयोजन किया जाता है।
इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी के मौके पर भगवान कृष्ण की पूजा के साथ कुछ शुभ वस्तुएं घर लाने की परंपरा भी है। ज्योतिषाचार्य डॉ. श्रीपति त्रिपाठी के अनुसार, जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर इन चीजों को घर लाना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। हालांकि, इनसे सुख-समृद्धि आने की बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
1. घर लाएं भगवान कृष्ण की बांसुरी
भगवान श्रीकृष्ण और उनकी बांसुरी का संबंध बेहद खास माना जाता है। कृष्ण की बांसुरी उनकी लीलाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे प्रेम, मधुरता तथा सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर लकड़ी की बांसुरी घर लाई जा सकती है।
इसे पूजा स्थल पर भगवान कृष्ण की प्रतिमा या लड्डू गोपाल के पास रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बांसुरी घर में सकारात्मक और शांत वातावरण का प्रतीक मानी जाती है।
2. गाय-बछड़े की प्रतिमा लाना माना जाता है शुभ
भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल और गोविंद के नाम से भी जाना जाता है। उनका बचपन गोकुल में गायों के बीच बीता था। इसलिए भगवान कृष्ण की पूजा में गाय का विशेष महत्व माना गया है।
जन्माष्टमी पर गाय और बछड़े की प्रतिमा घर लाने की परंपरा भी कई परिवारों में देखने को मिलती है। इसे घर के साफ-सुथरे स्थान या पूजा स्थल के पास रखा जा सकता है। धार्मिक मान्यता में गाय को श्रद्धा और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
3. जन्माष्टमी पर लाएं श्रीयंत्र
श्रीयंत्र को सनातन परंपरा में माता लक्ष्मी से संबंधित पवित्र यंत्र माना जाता है। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के साथ लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने की भी परंपरा है।
इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीयंत्र घर लाकर पूजा स्थल में स्थापित किया जा सकता है। इसकी स्थापना और पूजा अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा के अनुसार करनी चाहिए।
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4. तुलसी का पौधा घर में लगाएं
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र माना जाता है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है और श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। इसलिए कृष्ण पूजा में तुलसी का विशेष महत्व बताया गया है।
जन्माष्टमी से पहले या इस अवसर पर घर में तुलसी का पौधा लगाया जा सकता है। पौधे की नियमित देखभाल और पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी को घर में पवित्रता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।
5. पूजा के लिए रखें शुद्ध देसी घी
जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान दीपक जलाने की परंपरा है। पूजा के लिए शुद्ध देसी घी घर में पहले से रखा जा सकता है।
घी का दीपक जलाकर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान और पूजन किया जाता है। इसके बाद परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की प्रार्थना की जाती है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा रात्रि के निशीथ काल में करना शुभ माना जाता है। इस दिन निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के अनुसार पूजा के मुहूर्त में थोड़ा अंतर रहेगा।

जन्माष्टमी के व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को इस दिन खान-पान के साथ-साथ अपने आचरण का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत के दौरान अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। घर में तामसिक चीजों के इस्तेमाल से बचना चाहिए और भोजन में लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा जन्माष्टमी के दिन शराब और अन्य नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। व्रत रखने वाले व्यक्ति को क्रोध, अहंकार, छल-कपट और ईर्ष्या जैसे नकारात्मक भावों से बचने की कोशिश करनी चाहिए।
इस दिन किसी का बुरा न करें और न ही किसी के लिए कटु या अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जन्माष्टमी का पर्व भक्ति, संयम, सात्विकता और सकारात्मक भाव के साथ मनाना शुभ माना जाता है।
जन्माष्टमी पर क्या करें?
जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण या लड्डू गोपाल की विधि-विधान से पूजा करते हैं। कई लोग व्रत रखते हैं और रात में कृष्ण जन्म के बाद पूजा पूरी करते हैं। भगवान को माखन-मिश्री, पंचामृत, फल और अन्य प्रसाद अर्पित किया जाता है।
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